बेगूसराय। जिले में बाढ़ की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से सतर्क नजर आ रही है। इसी क्रम में, आज बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के लिए बेगूसराय पहुंच रहे हैं। उनके साथ स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी मौजूद रहेंगे। यह दौरा बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने और प्रशासनिक तैयारियों की जमीनी हकीकत परखने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
हवाई सर्वेक्षण और जमीनी निरीक्षण का कार्यक्रम
निर्धारित कार्ययोजना के तहत, मुख्यमंत्री सबसे पहले बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर के विस्तृत बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। इस एरियल सर्वे के जरिए जलभराव की व्यापकता, बाढ़ के फैलाव और प्रभावित आबादी की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा, ताकि उसी अनुसार राहत और बचाव कार्यों की रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सके।
हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर बरौनी रिफाइनरी परिसर स्थित हेलीपैड पर उतरेगा। यहां से वे सड़क मार्ग द्वारा सीधे मटिहानी प्रखंड के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों यानी छितरौर और खोरमपुर ढाला के लिए रवाना होंगे। इन जलमग्न गांवों में वे व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों से सीधा संवाद करेंगे और प्रशासन की तरफ से मुहैया कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लेंगे।
अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद, दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री बरौनी रिफाइनरी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। वहां जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में राहत शिविरों व सामुदायिक रसोई के सुचारू संचालन और पर्याप्त नावों की उपलब्धता पर विशेष चर्चा होगी।
इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं, जरूरी दवाओं की उपलब्धता, पशु चारे के प्रबंधन और गंगा-नदी के जलस्तर से होने वाले कटाव को रोकने के लिए चलाए जा रहे कटाव रोधी कार्यों की भी गहन समीक्षा की जाएगी।
जिला प्रशासन की चाक-चौबंद तैयारियां
मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर बेगूसराय जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद और एक्टिव मोड में है। सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। बरौनी रिफाइनरी के हेलीपैड से लेकर निरीक्षण स्थलों और संवेदनशील मार्गों तक अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि वीआईपी दौरे के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।



