अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने सासाराम के परिसदन में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान कृषि क्षेत्र में आ रहे संकट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि देश की खुशहाली सीधे तौर पर खेतों के स्वास्थ्य से जुड़ी है। यदि मिट्टी स्वस्थ नहीं होगी, तो मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित नहीं रह पाएगा।

​रासायनिक खेती का बढ़ता खतरा

​केंद्रीय मंत्री ने आगाह किया कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को तेजी से नष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा यदि हम इसी तरह अगले 20 से 25 वर्षों तक रसायनों का प्रयोग करते रहे, तो हमारे उपजाऊ खेत बंजर हो जाएंगे। उन्होंने खेती को भविष्य की पीढ़ी के लिए बचाने हेतु खेत बचाओ अभियान के महत्व पर जोर दिया।

​जैविक कृषि ही एकमात्र विकल्प

​मंत्री महोदय ने कहा कि वर्तमान में भारत सरकार किसान कल्याण की दर्जनों योजनाएं चला रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि किसान खेत कल्याण पर भी ध्यान दें। उन्होंने अधिकारियों और किसानों से आह्वान किया कि वे जैविक कृषि को न केवल अपनाएं, बल्कि उसे बड़े पैमाने पर बढ़ावा दें।
​उनका मानना है कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके और जैविक खाद का उपयोग बढ़ाकर न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है बल्कि उत्पादन को भी एक नई ऊंचाई दी जा सकती है। उन्होंने देश भर में कृषि अधिकारियों के साथ बैठकें कर इस संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है।

​प्रशासन और किसानों के साथ मंथन

​सासाराम दौरे के दौरान उन्होंने स्थानीय किसानों और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जैविक खेती की चुनौतियों को समझना और उन समाधानों पर विचार करना था जिनसे उर्वरकों का प्रयोग न्यूनतम हो सके। रामनाथ ठाकुर ने भरोसा दिलाया कि सरकार जैविक उत्पादों को बाजार दिलाने और किसानों को उन्नत तकनीक से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अंततः, उन्होंने दोहराया कि स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध भारत का आधार है।