अनमोल मिश्रा, सतना। मध्य प्रदेश में डिजिटल इंडिया और चमचमाती सड़कों के दावों के बीच जमीनी हकीकत आज भी विपरीत है। सतना जिले से विकास के खोखले दावों को उजागर करती एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां सूबे की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के ही विधानसभा क्षेत्र में सड़क न होने के कारण एक पैरालिसिस पीड़ित बुजुर्ग महिला को एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। परिजन और ग्रामीण मजबूरन बेबस बुजुर्ग को चारपाई पर लिटाकर डेढ़ किलोमीटर लंबे कीचड़ और मलबे से भरे रास्ते को पैदल पार कर मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे।
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1.5 किलोमीटर का ‘कच्चा नरक’, तड़पती रही बुजुर्ग महिला
यह पूरा मामला सतना जिले की कोठी तहसील अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गौरैया के रामपुरा गांव का है, जहां का सिस्टम पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुका है। दरअसल शनिवार को गांव की रहने वाली बुजुर्ग महिला प्रेमवती त्रिवेदी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने आपातकालीन मदद की कोशिश की लेकिन गांव का रास्ता इतना खतरनाक था कि एंबुलेंस ने हाथ खड़े कर दिए।
आखिरकार, ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई और बुजुर्ग महिला को खाट पर लिटाया। कीचड़ और जानलेवा फिसलन भरे कच्चे रास्ते पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलकर जैसे-तैसे उन्हें मुख्य सड़क तक लाया गया, जहां से उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सका।
राज्यमंत्री का क्षेत्र, 100 घरों की आबादी… लेकिन 20 साल से सुध नहीं!
हैरानी की बात यह है कि रामपुरा गांव कोई एकांत इलाका नहीं है, बल्कि यह लगभग 100 घरों की घनी आबादी वाला गांव है। ग्रामीण दुर्गेश त्रिवेदी ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यहां डब्ल्यूबीएम (WBM) सड़क का निर्माण कराया था। उसके बाद से आज तक विभाग ने कभी इस सड़क की मरम्मत की सुध नहीं ली। देखरेख के अभाव में पक्की सड़क पूरी तरह उखड़ गई और आज यह गहरे गड्ढों और मलबे वाले कच्चे रास्ते में तब्दील हो चुकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश आते ही गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना किसी जंग जीतने जैसा हो जाता है।
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सरपंच से लेकर मंत्री तक गुहार, मिला तो सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी इस बदहाली को लेकर सालों से नेताओं और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए स्थानीय सरपंच, सचिव से लेकर क्षेत्र की विधायक और वर्तमान नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी तक कई बार लिखित और मौखिक मांगें रखीं। लेकिन हर बार चुनाव में बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधियों ने जीतने के बाद इस गांव को भगवान भरोसे छोड़ दिया।
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