अनिल मालवीय, सीहोर। ​जिस स्वास्थ्य सिस्टम के भरोसे लाखों लोगों की ज़िंदगी टिकी है, जब वही खुद लाचार और वेंटिलेटर पर आ जाए, तो आम जनता भगवान भरोसे ही है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसा ही शर्मनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जहां मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने वाली सरकारी 108 एंबुलेंस खुद बीच राह में हाफ गई और बंद हो गई।

​मामला इछावर तहसील के ग्राम नादान का है। जहां सड़क के बीचों-बीच अचानक एक 108 एंबुलेंस खराब होकर खड़ी हो गई। एंबुलेंस को दोबारा स्टार्ट करने के लिए वहां कोई तकनीकी मदद नहीं थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों और स्कूल से लौट रहे मासूम छात्रों को आगे आना पड़ा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे स्कूली बच्चे और ग्रामीण मिलकर सरकारी सिस्टम की इस गाड़ी को ज़ोरदार धक्का लगा रहे हैं।

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जिम्मेदार कौन ?

इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल कर रख दी है। ​वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की बदहाली और गाड़ियों के लचर रख-रखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ​अगर एंबुलेंस में कोई गंभीर मरीज होता और इस देरी के कारण उसकी जान चली जाती, तो ज़िम्मेदार कौन होता ? ​गाड़ियों के मेंटेनेंस और बजट का पैसा आखिर कहां जा रहा है कि एंबुलेंस को धक्का मारना पड़ रहा है।

BMO ने जांच की कही बात

​​इस मामले को लेकर जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने गाड़ी में अचानक आई तकनीकी खराबी की बात कही। इछावर बीएमओ अंकित चांडक ने कहा कि मामला हमारे संज्ञान में आया है। एंबुलेंस में अचानक कोई तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण उसे चालू करने के लिए धक्का लगाना पड़ा। सभी एंबुलेंस के नियमित मेंटेनेंस के निर्देश दिए गए हैं। इस विशेष मामले की जांच कराई जा रही है कि गाड़ी में खराबी किस वजह से आई और क्या इसके रख-रखाव में कोई लापरवाही बरती गई थी ? भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित एजेंसी को सख्त हिदायत दी जा रही है।

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