पलवल। हरियाणा के पलवल जिले से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गांव चांदहट में बकरी के दूध से बनी लस्सी पीने के कुछ ही मिनटों बाद एक ही परिवार के सात लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी को पहले पलवल के नागरिक अस्पताल और बाद में गंभीर हालत में नूंह मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाया जा रहा है।
जिले के चांदहट गांव में रविवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब बकरी के दूध से बनी लस्सी पीने के कुछ ही देर बाद एक ही परिवार के सात सदस्य अचानक बीमार पड़ गए। सभी की हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल पलवल के नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए नूंह स्थित शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ रेफर कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, प्रभावित परिवार पिछले दो वर्षों से बकरी पालन कर अपना गुजारा कर रहा है। परिवार के पास करीब 20 बकरियां हैं। रविवार शाम करीब साढ़े पांच बजे बकरियों का दूध निकालकर उससे लस्सी तैयार की गई, जिसे परिवार के सात लोगों ने पिया।
15 मिनट बाद ही शुरू हो गए उल्टी और दस्त
परिजनों के मुताबिक, लस्सी पीने के महज 15 से 20 मिनट के भीतर तीन बच्चों को उल्टी और दस्त शुरू हो गए। इसके बाद एक-एक कर परिवार के अन्य सदस्यों की भी तबीयत बिगड़ने लगी और कुछ लोग बेहोश हो गए। घबराए परिजन पहले उन्हें गांव के एक निजी चिकित्सक के पास ले गए, जहां से तुरंत पलवल के नागरिक अस्पताल भेज दिया गया।
बच्चों और बुजुर्ग की हालत गंभीर
अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने करीब तीन घंटे तक लगातार उपचार किया और मरीजों के शरीर से संभावित विषैले तत्व निकालने का प्रयास किया। हालत गंभीर होने के कारण सभी को सरकारी एंबुलेंस से नल्हड़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार रेफर करते समय दो बच्चों और एक बुजुर्ग की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर थी।
घटना के बाद परिजनों ने आशंका जताई कि दूध में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट हो सकती है। वहीं, परिवार के सदस्य सोनू ने बताया कि उनकी एक बकरी दिन में बीमार थी। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि खेतों में इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों के संपर्क में आने से दूध प्रभावित हुआ हो सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो सबसे पहले बकरी पर असर दिखाई देता।
फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि दूध और अन्य नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला खाद्य विषाक्तता, किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट या किसी अन्य कारण से जुड़ा है।


