अजयारविंद नामदेव, शहडोल। आदिवासी अंचल शहडोल की पावन धरा इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के अद्भुत संगम की साक्षी बन रही है। यहां आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय किन्नर महासमागम में देशभर से पहुंचे किन्नर महामंडलेश्वर, संत-महात्मा, जगद्गुरु और धर्माचार्यों ने एक मंच पर एकत्र होकर सनातन संस्कृति, मानव कल्याण और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
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कार्यक्रम का आयोजन जगद्गुरु काजल ठाकुर मां भोपाल के सानिध्य में किया गया, जबकि इसकी मुख्य आयोजक सोनाली पटेल (शहडोल) एवं सिवानी पटेल (सिवनी) रहीं, समागम के पहले दिन संत समाज और किन्नर समुदाय का परिचय, संवाद एवं एकत्रीकरण हुआ, वहीं दूसरे दिन वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भव्य पट्टाभिषेक समारोह संपन्न कराया गया,आयोजन का सबसे विशेष और भावनात्मक क्षण वह रहा जब छह किन्नरों की विधिवत सनातन धर्म में घर वापसी कराई गई, शुद्धिकरण एवं धार्मिक विधानों के साथ संपन्न इस प्रक्रिया ने उपस्थित श्रद्धालुओं और संत समाज को भावविभोर कर दिया, गाजे-बाजे, धार्मिक ध्वज, जयघोष और पारंपरिक वेशभूषा के साथ निकली यात्रा ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल से सराबोर कर दिया।
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प्रेस वार्ता के दौरान जगद्गुरु काजल ठाकुर मां ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी धर्म का विरोध नहीं, बल्कि समाज सेवा, मानवीय मूल्यों की रक्षा और आध्यात्मिक जागरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म के नाम पर भय या अवैध वसूली करने वाले लोग वास्तविक किन्नर समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते, मुंबई, भोपाल, उज्जैन, नागपुर, जबलपुर, इंदौर, खंडवा, सागर और अमरावती सहित देश के विभिन्न शहरों से पहुंचे संतों और किन्नर नेताओं की उपस्थिति ने इस महासमागम को ऐतिहासिक बना दिया। शहडोल में आयोजित यह आयोजन सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और किन्नर समाज के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

