मथुरा. श्री बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए गोस्वामियों के सुझाव पर विचार करने के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की. पीठ ने गोस्वामियों के दो समूहों, शयन भोग और राज भोग, से दो-दो सदस्यों को नामित करने की अनुमति दी, जिससे वे कमेटी को सुझाव दे सकें.

पीठ ने कहा कि “हमने सिफारिश की है कि गोस्वामी के दो ग्रुप में से, यानी शयन भोग से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी, और राज भोग से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी को कमेटी में नामित किया जाना चाहिए.” पीठ ने आगे कहा कि वे पारंपरिक और धार्मिक रीति-रिवाजों और मंदिर के रोजाना के कामकाज में सुधार के लिए मिलकर सुझाव देंगे. बेंच ने कहा कि उसे लगता है कि इसमें कोई शक नहीं है कि उसके द्वारा बनाई गई कमेटी ऐसे सुझावों पर ध्यान देगी, और मंदिर के समय के बारे में भी सुझाव दिए जा सकते हैं. बेंच ने कहा कि उसे उम्मीद है कि कमेटी सुझावों पर ठीक से विचार करने के बाद फैसला लेगी.

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मंदिर में टूटी थी भोग की परंपरा

बता दें कि बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को लेकर चर्चाएं उठती रहती हैं. दिसंबर 2025 में एक मामला सामने आया था. जिसमें मंदिर के व्यवस्थाओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाई पावर कमेटी का गठन किया था, जिसके तहत ठाकुर जी के लिए प्रसाद और भोग तैयार करने के लिए हलवाई नियुक्त किया गया था. हलवाई को प्रतिमाह 80 हजार रुपये वेतन मिलता था, लेकिन कुछ महीनों से उसे सैलरी नहीं दी जा रही थी. परिणामस्वरूप, हलवाई ने ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं किया, जिससे सालों से चली आ रही परंपरा टूट गई है.