सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से आदिवासियों और गरीबों के आशियानों पर वन विभाग ने बुलडोजर चला दिया। चितरंगी तहसील के ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की इस औचक कार्रवाई ने सिस्टम की क्रूरता को उजागर किया है। हाथों में आवेदन और आंखों में बेबसी के आंसू लिए बुजुर्गों की तस्वीरें चीख-चीखकर प्रशासनिक क्रूरता की कहनी बयां कर रही हैं। करीब 25-30 गरीब परिवारों ने कलेक्टर का दरवाजा खटखटाया है और अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखली रोकने के लिए न्याय की गुहार लगाई है।

1969 से काबिज… दादा-परदादा की जमीन पर ‘अवैध’ घेराबंदी का खेल!

पीड़ित ग्रामीणों का दर्द और उनकी दलीलें बेहद मजबूत हैं, जो सीधे तौर पर शासन की नीतियों को कटघरे में खड़ा करती हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे वर्ष 1969 से सीलिंग की शासकीय भूमि पर काबिज हैं। उनके दादा-परदादा के समय से परिवार इसी मिट्टी में रह रहे हैं और खेती कर रहे हैं।

जिस जमीन को वन विभाग ‘अवैध’ बता रहा है, उसी जमीन पर सरकार ने खुद प्रधानमंत्री आवास बनवाए हैं, वहां सरकारी हैंडपंप लगे हैं और बिजली की वैध सुविधा भी उपलब्ध है। राजस्व और वन विभाग की आपसी सहमति से ही सालों पहले खेतों में सुधार किया गया था और ग्रामीणों ने यहां 100 से अधिक पेड़-पौधे लगाए थे।

पट्टे के नाम पर 40 हजार और बकरे की घूस! बीट गार्ड पर बड़ा आरोप

इस पूरे एक्शन के पीछे भ्रष्टाचार का एक बेहद घिनौना चेहरा भी सामने आया है, जिसने ग्रामीणों के गुस्से को भड़का दिया है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जुलाई माह में वन विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक उनकी काबिज जमीन पर घेराबंदी शुरू कर दी।

आरोप है कि बीट गार्ड मुंशी गरुण सिंह ने पट्टा दिलाने के नाम पर गांव के ही सीता प्रसाद केवट से 40 हजार रुपये नगद और एक बकरा रिश्वत के तौर पर लिया था। लेकिन अब पट्टा देने के बजाय विभाग इन गरीबों के पक्के मकानों को ही जमींदोज करने पर उतारू है।

18 जुलाई को चितरंगी तहसील का घेराव: गरीबों का अल्टीमेटम

अशिक्षित और बेहद गरीब इन परिवारों के लिए खेती ही आय का इकलौता साधन है। बेदखली की इस कार्रवाई से उनके सामने जीवन यापन और भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दे दी है कि यदि 18 जुलाई 2026 तक उनकी समस्याओं का कोई स्थाई समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील के सामने अनिश्चितकालीन धरना और उग्र प्रदर्शन शुरू कर देंगे।

प्रशासन बैकफुट पर: अपर कलेक्टर ने दिया राहत का भरोसा!

मामले के तूल पकड़ते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया है। ज्ञापन मिलने की पुष्टि करते हुए अपर कलेक्टर ने बड़े फैसले लिए हैं।

राजस्व और फॉरेस्ट विभाग की संयुक्त टीम की कार्रवाई को फिलहाल तुरंत प्रभाव से रोक दिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कराई गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच के तथ्यों के आधार पर जो भी व्यक्ति वास्तव में भूमिहीन पाया जाएगा, उसे वन विभाग से पट्टा दिलाया जाएगा।

जिन दो मकानों को वन विभाग ने जमींदोज कर दिया है, उन्हें अन्य जगह पर नया मकान दिया जाएगा। इसके साथ ही, इस भारी बरसात के मौसम में बेघर हुए परिवारों के रहने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव के माध्यम से कराई जा रही है।

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