सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश की ऊर्जाधानी के रूप में पहचान बना चुके सिंगरौली जिले ने एक बार फिर प्रदेश का नाम रोशन किया है। जिला खनिज और पंजीयन विभाग के बाद अब सिंगरौली के फॉरेस्ट विभाग ने भी रिकॉर्ड तोड़ राजस्व वसूल कर डॉ. मोहन यादव सरकार के खजाने को भरने का काम किया है। वन विभाग ने इस वित्त वर्ष में तय लक्ष्य से कहीं अधिक वसूली कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।
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510 करोड़ का था टारगेट, फॉरेस्ट विभाग ने वसूले 595 करोड़ रुपये
सिंगरौली जिले में वर्तमान में 12 प्रमुख परियोजनाएं संचालित हैं जो कोयला खनन के साथ-साथ उसके परिवहन का कार्य कर रही है। इन परियोजनाओं के जरिए वन विभाग को हर साल परिवहन राजस्व प्राप्त होता है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए शासन द्वारा वन विभाग को 510 करोड़ रुपये का रेवेन्यू टारगेट दिया गया था। वन विभाग ने बेहतरीन प्रबंधन के दम पर 595 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राजस्व वसूली कर ली है, जो तय लक्ष्य से 85 करोड़ रुपये अधिक है।
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DFO अखिल बंसल की सख्त मॉनिटरिंग और कुशल कार्यशैली का असर
इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय सिंगरौली के डीएफओ अखिल बंसल की सख्त मॉनिटरिंग और कुशल प्रशासनिक क्षमता को दिया जा रहा है। उनके कड़े दिशा-निर्देशों और सतत निगरानी के चलते ही ट्रांसपोर्टेशन और माइनिंग सेक्टर से राजस्व की शत-प्रतिशत पारदर्शी वसूली संभव हो सकी है।
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