प्रदीप मालवीय, उज्जैन। उज्जैन जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की समस्या से निपटने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी पहल शुरू की है। दक्षिण अफ्रीका में इस्तेमाल होने वाली बोमा पद्धति के जरिए नीलगायों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर संरक्षित क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इस अभियान की शुरुआत जिले के पिपलिया राघो क्षेत्र से की जा रही है।
उज्जैन जिले के कई ग्रामीण इलाकों में नीलगाय किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। रात होते ही झुंड के झुंड खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की जा रही थी। अब वन विभाग ने इस चुनौती से निपटने के लिए साउथ अफ्रीकन बोमा पद्धति को अपनाया है।
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बोमा स्ट्रक्चर किया जा रहा तैयार
इसके तहत फनल आकार का एक विशेष ढांचा तैयार किया जाता है, जिसमें नीलगायों को धीरे-धीरे हांककर लाया जाता है। जैसे-जैसे जानवर आगे बढ़ते हैं, वैसे-वैसे अलग-अलग हिस्सों के पर्दे बंद कर दिए जाते हैं, जिससे वे सुरक्षित रूप से नियंत्रित क्षेत्र में पहुंच जाते है। वन विभाग फिलहाल बोमा स्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। अगले दो से तीन दिनों तक क्षेत्र की निगरानी की जाएगी ताकि नीलगाय इस स्थान के माहौल में सहज हो सकें।
राजगढ़ और शाजापुर की टीमों की ली जा रही मदद
इसके बाद मैनुअल हर्डिंग यानी हाका लगाकर उन्हें बोमा तक लाने का प्रयास किया जाएगा। सफल होने पर नीलगायों को विशेष ट्रांसपोर्ट वाहन से सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाएगा। वन विभाग के मुताबिक चयनित क्षेत्र में नीलगायों के तीन से चार बड़े झुंड सक्रिय हैं और प्रत्येक झुंड में करीब 20 से 25 नीलगाय मौजूद है। अभियान को सफल बनाने के लिए राजगढ़ और शाजापुर की अनुभवी टीमों का भी सहयोग लिया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो जिले के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा।

