भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर से BSF-BGB में तनातनी बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. दोनों देशों की सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है. रानीनगर बॉर्डर पर 12 बांग्लादेशी नागरिकों की कथित घुसपैठ की कोशिश को लेकर भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर विवाद गहराता हुआ नजर आ रहा है. ऑपरेशन पुश बैक को लेकर बीएसएफ-बीजीबी में तनातनी बढ़ गयी है. भारत में बिना वैध दस्तावेजों के रहने के आरोप में 57 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है
‘ऑपरेशन पुश बैक’ भारत सरकार द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस उनके देश भेजने के लिए चलाया जा रहा एक प्रमुख सुरक्षा अभियान है.
बांग्लादेश सीमा से सटे गांवों के लोगों और BGB ने आरोप लगाया है कि शुक्रवार को एकदम सुबह-सुबह BSF ने सीमा का गेट खोलकर इन 12 लोगों को जबरन बांग्लादेश की सीमा में धकेल दिया है. ऑपरेशन पुश बैक भारत सरकार द्वारा ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचानें, हटाएं और निर्वासित करें) के सूत्र का उपयोग किया जा रहा है.
रानीनगर बॉर्डर पर 12 बांग्लादेशी नागरिकों में चार महिलाएं, चार बच्चे और चार पुरुष है. इन लोगों की नागरिकता को लेकर BSF-BGB में मतभेद अभी बहुत ही ज्यादा बढ़ा हुआ है.
लगातार दो दिनों तक इस मुद्दे पर फ्लैग मीटिंग हो चुकी है, पर अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकल सका. वहीं, BSF का कहना है कि रानीनगर सेक्टर से किसी भी व्यक्ति को बांग्लादेश नहीं भेजा गया है. BSF ने साफ-साफ एकदम कहा है कि जब कोई पुश बैक हुआ ही नहीं, तो किसी को वापस लेने का सवाल नहीं उठता है.
दूसरी तरफ BGB ने आरोप लगाया है कि ये सभी भारतीय नागरिक हैं और भारत को इन्हें वापस लेना चाहिए. पहली बैठक विफल रहने के बाद इन लोगों को अस्थायी रूप से बांग्लादेश के एक सीमावर्ती गांव में रखा गया, लेकिन शनिवार सुबह फिर जीरो प्वाइंट पर बैठा दिया गया है.
नदिया जिले में ही भारत में बिना वैध दस्तावेजों के रहने के आरोप में 57 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें से करीब 30 को कृष्णानगर जिला पुलिस और 27 को राणाघाट जिला पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
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