दिल्ली सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने साफ कहा है कि यदि कोई निजी स्कूल नियमों का पालन नहीं करता पाया गया, तो उसे टेकओवर भी किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, सरकार के राजस्व और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम कई निजी स्कूलों की जांच कर रही है। इस जांच में कई स्कूलों में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

इसी कड़ी में हाल ही में वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल में औचक निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण रोहिणी सेक्टर-13 स्थित स्कूल में संयुक्त टीम द्वारा बीते दो दिनों के दौरान किया गया। निरीक्षण के दौरान स्कूल में गंभीर प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा संबंधी अनियमितताएं पाई गईं। अधिकारियों के अनुसार, इन खामियों को गंभीरता से लिया गया है और आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

मिल रहीं शिकायतें

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, रोहिणी सेक्टर-13 स्थित वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों से अभिभावकों को प्रताड़ित करने और दाखिले के नाम पर अवैध डोनेशन वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर राजस्व और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने स्कूल का दो दिन तक औचक निरीक्षण किया। जांच में सामने आया कि स्कूल बिना वैध फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के संचालित हो रहा था, जो सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन है। इसके अलावा, स्कूल परिसर में बना स्विमिंग पूल भी बिना लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था। जांच के दौरान पूल में बुनियादी सुरक्षा इंतजामों का अभाव पाया गया, जिससे छात्रों की सुरक्षा को खतरा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्विमिंग पूल को सील कर दिया है।

बेसमेंट में चल रही क्लास

दिल्ली सरकार की टीम को रोहिणी सेक्टर-13 स्थित वेंकटेश्वर ग्लोबल स्कूल में कई और गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। निरीक्षण टीम के अनुसार, स्कूल के बेसमेंट में करीब 18 कमरों में कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। इनमें STEM लैब (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित), रोबोटिक्स, वेस्टर्न म्यूजिक और डांस जैसी गतिविधियां शामिल थीं। अधिकारियों ने इसे दिल्ली नगर निगम (MCD) के भवन मानकों, CBSE और शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। नियमों के अनुसार, छात्रों की गतिविधियों के लिए बेसमेंट का उपयोग प्रतिबंधित है। निरीक्षण के दौरान छात्रों ने पीने के पानी की खराब गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें दर्ज कराईं। इसके अलावा, स्कूल में भुगतान आधारित भोजन व्यवस्था पर भी सवाल उठे। जांच में सामने आया कि यह भोजन स्कूल की छत पर बने अस्थायी ढांचे में तैयार किया जा रहा था, जहां पास में लगे सोलर पैनलों के कारण गंभीर सुरक्षा जोखिम बना हुआ था।

DDA की जमीन पर बना है स्कूल

सरकार के अनुसार, इस स्कूल को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा लीज पर भूमि आवंटित की गई थी। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि संस्था का संचालन नियमों के अनुरूप न होकर लाभ कमाने के माध्यम के तौर पर किया जा रहा था। मामले में अब विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, सामने आई गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए DDA द्वारा लीज रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसके साथ ही, सरकार स्कूल का टेकओवर करने पर भी विचार कर रही है, ताकि छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सभी प्राइवेट स्कूलों की चल रही जांच

सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली के सभी निजी स्कूलों की व्यापक जांच की जा रही है और जहां भी गंभीर अनियमितताएं या प्रशासनिक गड़बड़ियां मिलेंगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को सरकारी टेकओवर के दायरे में भी लाया जा सकता है। यह कदम छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सभी निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वेनिर्धारित नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करें फीस संरचना को पूरी तरह पारदर्शी रखें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को नियमानुसार प्रवेश और सुविधाएं प्रदान करें सरकार ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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