कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त नजर आ रहा है। सुनवाई से पहले सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी यानी CEC ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में चंबल अभयारण्य के भीतर मौजूद राजस्व भूमि को छह महीने के भीतर संरक्षित वन घोषित करने, हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू करने और अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए कई अहम सिफारिशें की गई हैं। इस मामले में 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

छह महीने में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की सिफारिश

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभयारण्य के भीतर आने वाली राजस्व भूमि को वन कानून के तहत छह महीने के भीतर संरक्षित वन घोषित किया जाए, ताकि अवैध खनन से जुड़ी कार्रवाई में कानूनी बाधाएं खत्म हो सकें। रिपोर्ट में अभयारण्य की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित थर्मल कैमरे, पीटीजेड कैमरे और ड्रोन निगरानी के साथ छह महीने में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की सिफारिश की गई है। साथ ही चंबल से जुड़े सभी जिलों में संयुक्त निगरानी एवं प्रवर्तन समितियां बनाने का सुझाव भी दिया गया है।

अवैध रूप से निकाली जाने वाली रेत पर कार्रवाई

सीईसी ने अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों, फाइनेंसरों और अपराधियों का साझा डिजिटल डाटाबेस तैयार करने, सभी पुलों पर एआई आधारित ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लगाने और वन्यजीवों के वैज्ञानिक अध्ययन की व्यवस्था करने की भी अनुशंसा की है।रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी लाइसेंस प्राप्त रेत भंडारण डिपो स्थापित करने की बात कही गई है, जिससे अवैध रूप से निकाली जाने वाली रेत पर कार्रवाई हो सके,सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में 22 जुलाई को सुनवाई करेगा।

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