US Birthright Citizenship Law: यूएस ‘बर्थराइट सिटीजनशिप’ यानी जन्मजात नागरिकता कानून पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ऐसे बच्चों को जन्म से नागरिकता देने से इनकार किया गया था। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म से अमेरिकी नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता देश में अवैध रूप से रह रहे हों या फिर अस्थायी वीजा पर आए हों। यह फैसला दुनिया भर से अमेरिका जाकर बसने वाले लाखों प्रवासियों, खासकर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए राहत वाली खबर है।
बता दें कि अमेरिका में पिछले 158 साल से यह व्यवस्था लागू है कि वहां जन्म लेने वाला हर बच्चा अपने जन्म के साथ ही अमेरिकी नागरिक बन जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन में दिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में अमेरिका में बढ़ रहे प्रवासियों की संख्या को देखते हुए 20 जनवरी 2025 को एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन कर बर्थ राइट सिटीजनशिप पर रोक लगा दी थी। मामला संघीय (फेडरल) जिला अदालतों तक पहुंच गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस आदेश पर संघीय (फेडरल) जिला अदालतों ने इस आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला देते हुए कहा कि 14वां संशोधन जन्मजात नागरिकता की गारंटी देता है। लिहाजा राष्ट्रपति ट्रंप आदेश असंवैधानिक है और उसे रद्द किया जाता है।
6-3 के बहुमत से आया फैसला
न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से कार्यकारी आदेश को गैरकानूनी घोषित किया। यानी नौ जजों वाली पीठ में से छह जजों ने जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता को बनाए रखने के पक्ष में वोट किया, जबकि केवल तीन जज ही ट्रंप सरकार के इस प्रस्ताव के समर्थन में दिखे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) सामान्य कानून बनाकर जन्म से नागरिकता के अधिकार का दायरा नहीं बदल सकती। इस फैसले का मतलब ये है कि कोई भी राष्ट्रपति महज एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करके संविधान के बुनियादी ढांचे और नागरिकों के अधिकारों को नहीं बदल सकता।
भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और प्रवासियों को बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और प्रवासियों को मिलेगा, जो इस वक्त अमेरिका में रह रहे हैं। भारत से हर साल हजारों की संख्या में आईटी प्रोफेशनल्स H-1B और L1 जैसे वर्क वीजा पर अमेरिका जाते हैं। इनमें से बहुत से लोग सालों-साल ग्रीन कार्ड के इंतजार में कतार में खड़े रहते हैं। ट्रंप का आदेश लागू हो जाता तो ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे इन भारतीय वर्किंग कपल्स के सामने एक बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाता। उनके अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को वहां की नागरिकता नहीं मिलती।
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