हेमंत शर्मा, इंदौर। कानून के रखवाले ही जब कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो जनता न्याय की गुहार किससे लगाए? इंदौर से आई एक सनसनीखेज वारदात ने खाकी की साख पर एक बार फिर गहरा बट्टा लगा दिया है। द्वारकापुरी थाने का हेड कांस्टेबल तन्मय सिंह तोमर नशे में धुत होकर शराब दुकान में घुसता है, मुफ्त की शराब मांगता है और मना करने पर सेल्समैन की थप्पड़ों से पिटाई कर देता है। तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर प्रधान आरक्षक को सस्पेंड तो कर दिया गया, लेकिन इसके बाद शुरू हुआ अफसरों का असली ‘कवर-अप’ खेल!

कैमरा देखते ही उड़े होश: ACP शिवेंदु जोशी का बड़बोलापन!

जब मीडिया ने पूरे मामले को लेकर ACP शिवेंदु जोशी से तीखे सवाल पूछे, तो साहब अपनी जिम्मेदारी भूलकर उल्टे पत्रकारों पर ही भड़क उठे। एसीसी साहब का रवैया देखकर साफ लगा कि खाकी की नाकामी पर सवाल सुनते ही अफसरों को मिर्ची लग जाती है। *”पहले सवाल बताओ क्या पूछोगे, मुझे प्रिपेयर होने का मौका दो… मैं यहाँ PR करवाने नहीं आया हूँ!” यह कोई आम आदमी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के वो शब्द हैं जो कैमरे के सामने निकल पड़े। सवाल यह उठता है कि क्या सच का सामना करने के लिए भी पुलिस अधिकारियों को ‘तैयारी’ और ‘स्क्रिप्ट’ की जरूरत पड़ती है?

अवैध पिस्तौल या ‘लाइटर’? खाकी की इस थ्योरी पर खड़े हो रहे कई गंभीर सवाल

मामले में सस्पेंशन की लीपापोती तो कर दी गई, लेकिन पर्दे के पीछे के कई काले सच को दबाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है सूत्र बताते हैं कि थाने के ही अधिकारी के लिए तन्मय उगाई का काम भी करता था।

असली पिस्तौल या लाइटर का ड्रामा?

थाना प्रभारी का दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रही पिस्टल “लाइटर नुमा” या नकली है। पर सवाल यह है कि एक ऑन-ड्यूटी/ऑफ-ड्यूटी पुलिस जवान जेब में ‘नकली पिस्तौल’ लेकर क्यों घूम रहा था?25 आर्म्स एक्ट में फंसाने की साजिश? क्या यह नकली या अवैध हथियार किसी बेकसूर को झूठे केस (25 आर्म्स एक्ट) में फंसाने के लिए रखा गया था?

अवैध असलहे का खेल 

जानकारों और प्रत्यक्षदर्शियों का मानना है कि कमर में खोजी गई पिस्टल पूरी तरह अवैध थी,  जब पुलिसकर्मी को कोई सरकारी पिस्टल जारी ही नहीं हुई, तो कमर में अवैध हथियार रखे वाले पर सख्त आपराधिक धाराओं में एफआईआर क्यों नहीं?

जांच के नाम पर सिर्फ लीपापोती?

पुलिस का कहना है कि पिस्तौल असली नहीं लग रही है, वहीं ACP शिवेंदु जोशी का रटा-रटाया जवाब है कि ‘मामले की जांच की जा रही है’। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या सस्पेंशन ही हर अपराध का आखिरी इलाज है?अगर वीडियो वायरल न होता, तो क्या अफसर इस शराबी और दबंग पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करते या मामले को रफा-दफा कर दिया जाता? इंदौर पुलिस प्रशासन के इस रवैये ने साबित कर दिया है कि महकमे की छवि बचाने के लिए सच को दबाना ही इनकी पहली प्राथमिकता बन चुका है।

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