भारत का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ लद्दाख में बन रहा है. भारत-चीन सीमा के पास एक बहुत छोटा सा गांव स्थित है जिसकी आबादी सिर्फ 91 लोग की है अर्थात इस गांव में सिर्फ 91 लोग ही रहते हैं. लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 3 जून 2026 बुधवार को इसकी नींव रखी. 16700 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह चुमुर गांव को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के तहत आत्मनिर्भर, पर्यटन के लायक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया जाएगा. चुमुर गांव दूरदराज इलाकों में विकास का प्रतीक बनेगा.
24 परिवारों वाला चुमुर, लद्दाख का पहला ऐसा गांव है जिसे VVP के तहत चुना गया है. सितंबर 2026 तक चुमुर गांव आर्थिक गतिविधियों का केंद्र होगा.
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, के तहत आत्मनिर्भर, पर्यटन के लायक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा चुना गया 16,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित चुमुर गांव भारत का पहला ‘मॉडल सीमा गांव’ बन रहा है. यह गांव Line of Actual Control के काफी करीब है. यहां के लोगों का मुख्य धंधा पश्मीना बकरियों को पालना है, और यहीं पेशा यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है.

24 परिवारों वाला चुमुर, जिसमें सिर्फ 91 लोग रहते हैं, आकार में छोटा होने के बावजूद, ये गांव सीमाई इलाकों में आबादी को मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश का केंद्र है. केंद्र सरकार के अनुसार गांव के सभी 24 परिवारों को ऐसे जलवायु-अनुकूल घर मिलेंगे जिनकी दीवारें थर्मल इंसुलेशन वाली होंगी जिससे कि ज्यादा कठोर मौसमी परिस्थितियों का सामना कर सकें.
आधारशिला रखने के बाद उपराज्यपाल ने कहा कि चुमुर मॉडल बॉर्डर विलेज राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थिरता व सीमावर्ती क्षेत्रों की मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह परियोजना भविष्य में देश के अन्य सीमावर्ती गांवों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगी. यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत व आत्मनिर्भर सीमांत गांव के विजन के अंतर्गत शुरू की गयी है.
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