Dharm Desk – मलमास समाप्त होते ही एक बार फिर विवाह का सीजन पूरे शबाब पर लौट आया है, बीते एक महीने से ठप मांगलिक कार्य अब जोर पकड़ने लगे है, चातुर्मास शुरू होने से पहले जून और जुलाई में केवल 12 शुभ मुहूर्त ही शेष मिलने वाले हैं, जिसके चलते विवाह योग्य युवक-युवतियों के परिवारों में व्यस्तता ज्यादा है.

सीमित मुहूर्त ने बढ़ाई मांग

जून माह में 19 से 30 जून तक लगातार शुभ तिथियां हैं, जबकि जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8 और 11 जुलाई को ही विवाह के शुभ योग बन रहे है. इसके बाद 15 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. ऐसे में लोग जल्द से जल्द विवाह संपन्न कराने में जुटे है.

चातुर्मास का प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा. जो लगभग 4 माह तक चलेगा. इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते. इसी कारण सीमित समय में अधिक विवाह होने की संभावना जताई जा रही है.

गुरु अस्त होने से लगेगा विराम

15 जुलाई से देवगुरु बृहस्पति अस्त हो जाएंगे. गुरु को विवाह और शुभ कार्यों का कारक माना जाता है. उनके अस्त होने के दौरान मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना, इसलिए 15 जुलाई के बाद फिर से शादी समारोहों पर ब्रेक लग जाएगा.

धार्मिक मान्यता और परंपरा

पंडितों का कहना है कि मलमास यानी पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की आराधना के लिए श्रेष्ठ था. लेकिन इस दौरान विवाह नहीं होते है. अब इस अवधि के समाप्त होते ही विवाह की तैयारियां तेजी से शुरू हो गई हैं और हर तरफ शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगी है.

क्यों जरूरी है शुभ मुहूर्त का होना

भारतीय संस्कृति में विवाह को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार होता है. मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया विवाह जीवन में सुख-समृद्धि और स्थिरता लाता है, यही वजह है कि लोग सीमित समय में भी सही तिथि का इंतजार करते हैं.