Dharm Desk – एक हथिया देवाल शिव मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और रहस्य के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना है. यहां रह साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन खास बात यह है कि इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा कोई नहीं करता. राजधानी देहरादून से करीब 76 किलोमीटर दूर ग्राम सभा बल्तिर में स्थित इस मंदिर के विषय में जो भी कहानी सुनता है वह चौक जाता है.

मंदिर एक हाथ वाले कारीगर ने एक रात में बनाया

इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक अद्भुत कथा प्रचलित है,बबताया जाता है कि गांव में रहने वाला एक मूर्तिकार दुर्घटना में अपना एक हाथ खो बैठा था. ग्रामीणों के तारों से आहत होकर उसने उसे गांव को छोड़ने का निर्णय ले लिया. जाने से पहले उसने दक्षिण दिशा में स्थित एक विशाल चट्टान पर पूरी रात काम किया. सुबह तक एक संपूर्ण मंदिर तैयार कर दिया. अगली सुबह जब ग्रामीण वहां पहुंचे तो यह दृश्य देखकर हैरान रह गए, लेकिन वह कारीगर हमेशा के लिए गांव छोड़ चुका था. इसी वजह से इस मंदिर का नाम एक हथिया देवाल पड़ गया.

मंदिर निर्माण को लेकर खास बात

मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर एक खास बात सामने आई. पंडितों ने पाया कि शिवलिंग की जलाधारी (अरघा) उलटी दिशा में बनी हुई है. इसे ठीक करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद यह तय किया गया कि इस शिवलिंग की पूजा नहीं की जाएगी. तभी से यहां पूजा-अर्चना बंद है. श्रद्धालु केवल दर्शन कर लौट जाते हैं.

मंदिर का इतिहास कत्यूरी काल से जुड़ा है

इस मंदिर का संबंध प्राचीन कत्यूरी शासन काल से भी जोड़ा जाता है. उस दौर में शासक स्थापत्य कला के लिए जाने जाते थे. और भव्य निर्माण कार्य कराते थे. एक हथिया देवाल का उल्लेख पुराने अभिलेखों में भी मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता स्पष्ट होती है.

पूरा मंदिर चट्टान को तराशकर बना है

मंदिर की संरचना भी बेहद खास है. इसे एक ही विशाल चट्टान को काटकर बनाया गया है. नागर शैली की झलक इसके निर्माण में साफ दिखाई देती है. मंदिर का प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर है जबकि मंडप की ऊंचाई लगभग 1.85 मी. और चौड़ाई 3.15 मी. है. शिवलिंग भी उसी चट्टान का हिस्सा है, जिसे तराशकर तैयार किया गया है.

मंदिर परिसर के नौला में होते हैं संस्कार

मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन जलस्रोत है, जिसे स्थानीय भाषा में नौला कहा जाता है. यहां बच्चों के मुंडन जैसे संस्कार कराए जाते हैं. स्नान की परंपरा भी निभाई जाती है. पूजा भले ही मंदिर में न हो, लेकिन यह स्थान धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है.

श्रद्धा और रहस्य का अनोखा संगम

एक हथिया देवाल आज भी आस्था और रहस्य का अनोखा उदाहरण है. जहां एक ओर लोग भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते है वहीं दूसरी ओर पूजा न किए जाने की परंपरा इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है. यही वजह है कि यह स्थान उत्तराखंड के प्रमुख आकर्षणों में गिना जाता है.