रोहतक। हरियाणा के रोहतक में करीब छह साल पुराने चर्चित पॉक्सो और दुष्कर्म मामले में जिला अदालत ने सभी सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस मामले में दो सगे भाई भी आरोपी थे, जो करीब छह साल तक जेल में रहे। अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर लंबी न्यायिक प्रक्रिया और कथित झूठे मुकदमों को लेकर चर्चा में आ गया है।

मामले की शुरुआत 1 अक्टूबर 2020 को हुई थी। सांपला थाना में पहले आपसी मारपीट और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया। बचाव पक्ष का दावा है कि करीब 24 घंटे बाद शिकायत में बदलाव करते हुए दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ दी गईं। इसके बाद कुल सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
बचाव पक्ष के अनुसार, मामले में आरोपी दो सगे भाइयों को निचली अदालत से लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक कहीं से भी जमानत नहीं मिली और वे पूरे छह साल तक जेल में रहे।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 में से 26 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए। सभी गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद रोहतक जिला अदालत में एडिशनल सेशन जज शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने पाया कि आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसके आधार पर अदालत ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया।

फैसले के बाद बचाव पक्ष के वकील अभिषेक कुमार ने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि मामला आपसी विवाद के बाद दर्ज कराया गया था। उनका दावा है कि पहले छेड़छाड़ की एफआईआर दर्ज हुई और बाद में उसे दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में बदल दिया गया, जिसके कारण दो सगे भाइयों सहित सात लोगों को लंबे समय तक मुकदमे का सामना करना पड़ा।

हालांकि, अदालत का यह फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर दुष्कर्म या पॉक्सो का मामला झूठा होता है। यह निर्णय केवल इस विशेष मामले के तथ्यों और साक्ष्यों तक सीमित है।

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