यूजीसी के प्रस्तावित कानून के विरोध में कुंवरपुर गांव के ग्रामीणों ने नेताओं के प्रवेश और वोट मांगने पर रोक लगाने का ऐलान किया है. गांव के बाहर रोलबैक की मांग वाले पोस्टर लगाए गए, जिन्हें पुलिस ने बाद में हटवा दिया.

हापुड़. उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्तावित कानून को लेकर कुंवरपुर गांव के ग्रामीणों ने विरोध तेज कर दिया है. पहासू क्षेत्र के इस गांव के बाहर ग्रामीणों ने ‘यूजीसी रोल बैक नहीं तो वोट नहीं’ का संदेश लिखे पोस्टर लगाए और आगामी चुनाव को देखते हुए नेताओं के गांव में प्रवेश तथा वोट मांगने पर रोक लगाने की बात कही.

कानून के खिलाफ नाराजगी

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित कानून सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ है. कुंवरपुर निवासी नीरज शर्मा ने कहा कि इस कानून के जरिए सवर्ण समाज विरोधी राजनीति की जा रही है.

ग्रामीणों का दावा है कि कानून लागू होने के बाद सवर्ण समाज के युवाओं के लिए अपनी बात स्वतंत्र रूप से रखना मुश्किल हो सकता है. उनका आरोप है कि भविष्य में इससे युवाओं के मानसिक शोषण की स्थिति बन सकती है.

विरोध का दायरा बढ़ा

यूजीसी के प्रस्तावित कानून के खिलाफ पहासू क्षेत्र के दूसरे गांवों में भी विरोध की बात सामने आई है. इससे पहले क्षत्रिय करणी सेना की ओर से कानून के विरोध में भूख हड़ताल की गई थी.

इसके बाद सनातन रक्षा वाहिनी के प्रमुख प्रिंस जादौन के नेतृत्व में भी भूख हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया गया. कुंवरपुर में ग्रामीणों ने अब नेताओं के प्रवेश और चुनाव के दौरान वोट मांगने पर रोक लगाने का निर्णय जताया है.

पुलिस ने हटवाए पोस्टर

कुंवरपुर में वीरेंद्र, शुभम, सोनी समेत अन्य ग्रामीणों ने एकजुट होकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया. सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत कर प्रदर्शन को शांत कराया.

थाना प्रभारी के मुताबिक, एहतियात के तौर पर गांव में लगाए गए विरोधी बैनर और पोस्टर हटवा दिए गए हैं. फिलहाल क्षेत्र में स्थिति शांत है, हालांकि ग्रामीणों में प्रस्तावित कानून को लेकर नाराजगी बनी हुई है.