मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. पुराने संपत्ति कर के बकायेदारों के लिए नगर निगम अयोध्या ने बड़ी राहत का ऐलान किया है. प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एकमुश्त समाधान योजना (OTS-2026) नगर निगम अयोध्या में लागू कर दी गई है, जो 15 अगस्त 2026 से 15 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी. नगर निगम सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने योजना की विस्तृत जानकारी दी.

महापौर ने बताया कि OTS योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 14 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है, इसके बाद किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह योजना 1 अप्रैल 2026 तक के बकाया संपत्ति कर पर लगे ब्याज और सरचार्ज पर ही लागू होगी. करदाता को मूल बकाया कर के साथ वर्तमान वर्ष की मांग का भुगतान करना अनिवार्य होगा.

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नगर निगम के अनुसार योजना में करदाताओं को बड़ी सहूलियत देते हुए बकाया राशि को तीन समान मासिक किस्तों में जमा करने का विकल्प दिया गया है. भुगतान केवल नकद और डिमांड ड्राफ्ट (DD) के माध्यम से ही किया जा सकेगा, चेक किसी भी दशा में स्वीकार नहीं होंगे. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन किया जा सकता है. ऑनलाइन आवेदन के लिए www.upulbots.in पोर्टल और नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट www.nagarnigamayodhya.in पर सुविधा उपलब्ध है.

यह योजना नगर निगम सीमा के अंतर्गत आने वाले सभी प्रकार के आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक भवनों, सरकारी कार्यालयों, पीएसयू, बैंकों और स्वायत्तशासी संस्थाओं पर लागू होगी, जिन पर बकाया कर और ब्याज लंबित है. जिन भवनों पर केवल वर्तमान मांग शेष है या जिन्होंने पहले ही अपना पूरा बकाया जमा कर दिया है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.

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मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि नगर निगम अयोध्या में OTS के दायरे में कुल 25,761 भवन और संपत्तियां चिन्हित की गई हैं. इन पर कुल मूल बकाया 21 करोड़ 12 लाख 36 हजार 392 रुपये है, जिस पर 7 करोड़ 39 लाख 32 हजार 737 रुपये का ब्याज लगा हुआ है. निगम को इस योजना के तहत करीब 15.84 करोड़ रुपये की वसूली होने का अनुमान है. नगर निगम द्वारा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए समाचार पत्रों, शहर के प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग्स, आकाशवाणी, एलईडी डिस्प्ले और आईटीएमएस सिस्टम के जरिए जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. महापौर ने सभी पात्र करदाताओं से अपील की है कि इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाकर निर्धारित अवधि में अपने बकाया संपत्ति कर का समाधान अवश्य कराएं.