मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. बैठकों का दौर शुरू हो गया है. पार्टी मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक हलचल बढ़ गई है. गठबंधन धर्म निभाते हुए सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी स्तर पर व्यापक आंतरिक सर्वे कराया जा रहा है. इस सर्वे में बूथ स्तर तक जाकर यह आंकलन किया जा रहा है कि गठबंधन के तहत किस जिले की कौन सी सीट पर कांग्रेस को दावा करना चाहिए और कहां सहयोगी दल को समर्थन देना फायदेमंद रहेगा.
जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण को सबसे ज्यादा तरजीह दी जाएगी. “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” के सिद्धांत के आधार पर तय होगा कि किस क्षेत्र से किस वर्ग के व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया जाए. इसका सीधा मतलब है कि जिस विधानसभा क्षेत्र में जिस जाति या वर्ग की आबादी निर्णायक होगी, वहां उसी समाज से आने वाले नेता को टिकट दिए जाने की संभावना प्रबल रहेगी. स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं, ब्लॉक अध्यक्षों और जिला पदाधिकारियों से मिले इनपुट के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. यह रिपोर्ट सीधे शीर्ष नेतृत्व और हाईकमान को सौंपी जाएगी, जिसके बाद अंतिम मुहर लगेगी.
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2024 के मॉडल को 2027 में दोहराने की तैयारी
कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ हुए संयुक्त प्रयास को बड़ी सफलता मान रही है. पार्टी का मानना है कि उसी एकजुटता को अगर 2027 के विधानसभा चुनाव में दोहराया गया, तो सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर दी जा सकती है. आगे की सम्पूर्ण चुनावी रणनीति हाईकमान के दिशा-निर्देशानुसार ही तय की जाएगी.
‘संगठन सृजन’ से मजबूत होगा ढांचा
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (ओबीसी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी ओम प्रकाश महतो ने आगामी चुनावों और पार्टी की रणनीतियों को लेकर मीडिया से विस्तार से बातचीत की. उन्होंने कहा कि पार्टी संगठन को हर वर्ग के लिए अधिक समावेशी और मजबूत बनाने पर लगातार कार्य कर रही है. महतो ने बताया कि पिछली जिला एवं प्रदेश कमेटियों के गठन में जो कमियां रह गई थीं, उन्हें दूर करने के लिए ‘संगठन सृजन’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिला और प्रदेश स्तर पर समाज के सभी वर्गों-दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक, अगड़ा और युवाओं-का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है.
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नेतृत्व को भरोसा, 2027 में यूपी, 2029 में दिल्ली
बातचीत के दौरान पार्टी नेताओं ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयास निश्चित रूप से रंग लाएंगे. उनका दावा है कि 2027 में उत्तर प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनेगी और 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. उनका कहना है कि समाज के हर तबके को संगठन से जोड़कर सामाजिक न्याय के सिद्धांत को धरातल पर मजबूत करने का कार्य लगातार जारी है, और यही कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेगा.



