मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. एक तरफ जहां सरकार हर गरीब को पक्का मकान देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चला रही है. वहीं दूसरी तरफ धरातल पर कई पात्र परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं और अपने हक के पक्के मकान से वंचित हैं. ताजा मामला जिले के बीकापुर विकास खंड क्षेत्र के गोबिंदपुर ग्राम सभा के प्रानपुर मजरे का है. जहां पीड़ित राधेश्याम विश्वकर्मा ने ग्राम प्रधान पर अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है. राधेश्याम के अनुसार, वे पिछले 11 से 12 वर्षों से एक पक्के मकान आवास योजना की आस में भटक रहे हैं.
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कच्चे छप्पर में रहने को मजबूर 4 बच्चों का परिवार
पीड़ित राधेश्याम का आरोप है कि उनका 6 सदस्यों का परिवार है, जिसमें उनके 4 छोटे बच्चे भी शामिल हैं. पक्का मकान न होने के कारण पूरा परिवार एक जर्जर कच्चे छप्पर-झोपड़ी के नीचे गुजर-बसर करने को विवश है. बरसात और मौसम की मार के बीच छोटे बच्चों के साथ इस तरह रहना किसी खतरे से कम नहीं है.
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प्रधान ने मदद से किया इनकार
राधेश्याम का आरोप है कि जब भी वे अपनी समस्या लेकर ग्राम प्रधान के पास जाते हैं, तो उन्हें सहायता देने से साफ इनकार कर दिया जाता है. प्रधान द्वारा कथित तौर पर यह कहकर टाल दिया जाता है कि “हम तुम्हारा काम (आवास) नहीं करवा पाएंगे. वर्षों से चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई न होने से निराश होकर पीड़ित परिवार अब उच्च अधिकारियों से न्याय और आवास योजना का लाभ दिलाए जाने की गुहार लगा रहा है. वहीं एसडीएम ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराने के बाद पात्र को आवास योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया.



