लखनऊ. अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद में सरकार के जवाब के लिए समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है. उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में दिया गया जवाब अगर सिर्फ औपचारिकता बन जाए तो वह वास्तविक जवाब नहीं, बल्कि ‘थोथा बयान’ रह जाएगा. सरकार की कोशिश है कि सवालों का जवाब देने के बजाय संसद का सत्र जल्द समाप्त हो जाए. जिम्मेदारी और जवाबदेही घड़ी की सुई से तय नहीं होती, बल्कि उत्तरदायित्व से तय होती है.

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‘देश भाषण सुनने के मूड में नहीं’

सपा प्रमुख ने कहा कि मौजूदा मुद्दे महज सवाल-जवाब की औपचारिकता नहीं हैं. उन्होंने कहा कि यह ‘भगवान और इंसान’ दोनों के साथ दुर्व्यवहार और दुर्भावना से जुड़ा गंभीर विषय है. ऐसे में देश केवल भाषण सुनने के बजाय सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है.

भाजपा के शब्दकोश में जवाबदेही नहीं

अखिलेश यादव ने हमीरपुर में सड़क की मांग को लेकर स्कूली बच्चों के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब वर्षों तक किसी की सुनवाई नहीं हुई तो बच्चों को जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचकर अपनी आवाज उठानी पड़ी. उनके मुताबिक इससे साफ है कि अगर शासन-प्रशासन जनता तक नहीं पहुंचेगा तो जनता खुद शासन तक पहुंचेगी. उन्होंने भाजपा पर ‘जनतंत्र को धनतंत्र’ में बदलने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता का उद्देश्य समाज का दोहन नहीं, बल्कि समाज का कल्याण होना चाहिए.

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जेवर से राम मंदिर तक भ्रष्टाचार के आरोप

अखिलेश यादव ने भाजपा शासित सरकारों पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए कई घटनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट के पास बारिश में जलभराव, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे पर गड्ढे, जल जीवन मिशन की टंकियों के गिरने और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी जैसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में हुए कामों में कमीशनखोरी और बजट की लूट हुई है. उनका कहना था कि इतना सब होने के बावजूद किसी की जवाबदेही तय नहीं होती.

‘सरकार समाज के लिए है’

सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ऊपर से नीचे तक ‘एकतंत्र’ स्थापित करना चाहती है, जबकि लोकतंत्र की दिशा नीचे से ऊपर की ओर होती है. उन्होंने समाजवादी सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि “समाज के लिए सत्ता है” और यदि शासन जनता के कल्याण के लिए काम नहीं करता तो सरकार के अस्तित्व का औचित्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है. एफसीआरए बिल पर भी अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा विपक्ष इसके खिलाफ है और आरोप लगाया कि सरकार के विधेयक अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ होते हैं.