सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई (MSME) और निर्यात प्रोत्साहन सचिव प्रांजल यादव ने कहा है कि सरकार सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को लगातार बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि वेण्डर डेवलपमेंट और सरकारी खरीद एमएसएमई के लिए बड़े अवसर हैं. GeM पर एमएसई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है, जिसकी राशि लगभग नौ लाख करोड़ रुपये है.

गुरुवार को गोमती नगर स्थित पीएचडी हाउस में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को सरकारी खरीद और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से जोड़ने के उद्देश्य से दो दिवसीय “वेण्डर विकास कार्यक्रम-2026” का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल प्रांजल यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक तंत्र में एमएसएमई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. राज्य में 100 उद्योगों में 98 से अधिक एमएसएमई हैं और करीब 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म उद्यम हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं को उद्यमिता की ओर आगे बढ़ना चाहिए और औद्योगिक भूखंड, वित्त, सब्सिडी और प्रोत्साहन जैसी एमएसएमई की प्रमुख जरूरतों पर ध्यान दिया जा रहा है.

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उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब दो लाख करोड़ रुपये है. इसमें नोएडा का योगदान करीब 98 हजार करोड़ और गाजियाबाद का करीब 18 हजार करोड़ रुपये है. कानपुर, मुरादाबाद, भदोही, उन्नाव, बरेली, आगरा और वाराणसी जैसे औद्योगिक केंद्र भी निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. आगरा और पूर्वांचल समेत विभिन्न क्षेत्रों में एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स क्लस्टरों के विकास के लिए भी कार्य किया जा रहा है.

छोटे उद्यमों के लिए बड़े कारोबारी अवसर

एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा ने कहा कि सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी बढ़ाने के लिए 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य निर्धारित है. सीपीएसई द्वारा एमएसई से खरीद किए जाने से छोटे उद्यमों के लिए बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं. उन्होंने उद्यमियों से वेण्डर पंजीकरण और खरीद प्रक्रियाओं को समझकर इन अवसरों का लाभ उठाने की अपील की.

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GeM के यूपी स्टेट नोडल एवं डिप्टी सीईओ कृष्ण मुरारी ने बताया कि वर्ष 2017 में लॉन्च होने के बाद GeM पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है, जिसमें एमएसई की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत यानी करीब नौ लाख करोड़ रुपये है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भी करीब एक लाख करोड़ रुपये की खरीद की गई है. उन्होंने बताया कि करीब 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत हुए हैं.

सात से आठ हजार करोड़ रुपये की खरीद

आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक, स्टोर्स अकमल वदूद ने कहा कि लखनऊ और आसपास का रेलवे तंत्र एमएसई के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराता है. रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री में करीब सात से आठ हजार करोड़ रुपये की खरीद होती है. नॉर्दर्न रीजन में करीब 70 प्रतिशत खरीद एमएसई से की जा रही है और एमएसई से 250 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की गई है. एचएएल लखनऊ के डीजीएम, आउटसोर्सिंग प्रमोद बरनवाल ने कहा कि लखनऊ में एचएएल की आउटसोर्सिंग में करीब 25 प्रतिशत वृद्धि हुई है. सेना और नौसेना की आवश्यकताओं से जुड़े करीब 2.5 लाख ऑर्डर संभाले जा रहे हैं, ऐसे में समय पर उत्पादन और आपूर्ति जरूरी है.

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ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) के जितेन्द्र कुमार ने मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी एंड क्वालिटी विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए गुणवत्ता और मानकीकरण के महत्व को रेखांकित किया. इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पैकेजिंग के प्रो. अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग उत्पाद की सुरक्षा के साथ उसकी पहचान, प्रस्तुति और बाजार में स्वीकार्यता को भी प्रभावित करती है.