सतीश सिंह, लखनऊ. राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने केंद्र की मोदी सरकार पर युवाओं, किसानों और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था. इस हिसाब से 12 वर्षों में 24 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए था, लेकिन वास्तविकता यह है कि बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ी है.
इसे भी पढ़ें- बाबा’राज’ में कहां सेफ हैं ‘बेटियां’! नाबालिग से रेप और जान से मारने की धमकी देने वाले 2 आरोपी गिरफ्तार, तो ऐसे आएगा ‘रामराज’?
प्रमोद तिवारी ने पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों और युवाओं पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया और उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए. उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों युवा इस कार्रवाई में घायल हुए हैं. युवाओं की केवल यही मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष और पारदर्शी हों और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगे.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को स्वयं इस्तीफा दे देना चाहिए, अन्यथा उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर जवाब देने के बजाय युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है.
इसे भी पढ़ें- छात्रों को नौकरी नहीं, लाठियां दे रही सरकार… अखिलेश यादव का मोदी सरकार पर करारा हमला, जंतर-मंतर में हुई बर्बरता पर दिया बड़ा बयान
किसानों के मुद्दे पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी पूरा नहीं हुआ. खेती की लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जिससे वे अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद बना है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शास्त्र सम्मत परंपराओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा भगवान श्रीराम को आस्था के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है.


