रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. बड़े राजनीतिक नामों, पारिवारिक विरासत और भावनात्मक नारों से लंबे समय तक देश की राजनीति में चर्चा बटोरने वाले रायबरेली में अब जनता का धैर्य जवाब देता दिखाई दे रहा है. मतदाताओं ने साफ कर दिया है कि सम्मान और पहचान अपनी जगह हैं, लेकिन केवल नाम के सहारे क्षेत्र का भविष्य नहीं बदला जा सकता. जनता का सीधा सवाल है, जब रायबरेली देश की राजनीति में इतना बड़ा नाम है, तो यहां विकास जमीन पर इतना छोटा क्यों दिखाई देता है?

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि चुनाव आते ही रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, किसानों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं. चुनाव बीतते ही वही समस्याएं फिर सामने खड़ी हो जाती हैं. गांवों में खराब सड़कें, जलभराव, पेयजल का संकट और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी लोगों को परेशान कर रही है. शहरों में यातायात, सफाई और जलनिकासी की समस्याएं लगातार बनी हुई है.

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पढ़े-लिखे युवा रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों का रुख कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर उद्योग और रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. युवाओं का कहना है कि यदि राजनीतिक प्रभाव इतना बड़ा है, तो रायबरेली में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं दिखाई देती?

किसानों की स्थिति भी राजनीतिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है. सिंचाई, बिजली, खाद-बीज, फसल का उचित मूल्य और भंडारण की समस्याएं अब भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी हैं. किसान पूछ रहे हैं कि योजनाओं और घोषणाओं का लाभ कागजों से निकलकर खेतों तक कब पहुंचेगा.

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रायबरेली को वर्षों से बड़े नेताओं का प्रतिनिधित्व मिला, लेकिन जनता को अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. आरोप है कि बड़े नामों की आड़ में विकास के वास्तविक सवाल दबाए जाते रहे हैं. वहीं सत्तापक्ष और समर्थक दलों का कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए योजनाएं चल रही हैं और आने वाले समय में उनका असर दिखाई देगा. अब जनता इन दावों को काम की कसौटी पर परखना चाहती है.

मतदाताओं की मांग है कि जनप्रतिनिधि चुनावी मौसम में ही नहीं, पूरे कार्यकाल में जनता के बीच रहें. विकास योजनाओं का खर्च, समयसीमा और प्रगति सार्वजनिक की जाए. जनता अब यह भी जानना चाहती है कि किस वादे पर कितना काम हुआ और कौन-सी योजना अभी तक अधूरी है. रायबरेली की सियासत में अब सवाल सीधा है, नाम बड़ा है तो काम भी बड़ा दिखना चाहिए. जनता को राजनीतिक विरासत की कहानी नहीं, अपने बच्चों का रोजगार, बेहतर अस्पताल, अच्छी सड़क और सुरक्षित भविष्य चाहिए .