शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश ब्यूरोक्रेसी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां महिला आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या के बार-बार हो रहे तबादलों के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। पिछले 1 साल में 4 तबादले और हाल ही में महज 50 दिनों के भीतर नई जिम्मेदारी मिलने से विचलित हुई आईएएस नेहा मारव्या ने अधिकारियों के आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप में एक लंबी पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी और दर्द बयां किया है। उन्होंने इस पोस्ट के जरिए न सिर्फ अपने तबादले पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यशैली और आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
‘एक महीने में काम समझते हैं, मेरा कार्यकाल ही 2-3 महीने का रहता है’
आईएएस नेहा मारव्या ने लगातार हो रहे तबादलों पर प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया।अधीनस्थों के विद्रोह का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मातहत काम करने वाले कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विद्रोह किया था और उन्हें खुलेआम तबादला कराने की धमकी दी थी।कार्रवाई के बजाय मिला तबादला: नेहा मारव्या ने सवाल उठाया कि शिकायत करने के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उनकी ही जिम्मेदारियों को सीमित कर दिया गया और उनका ट्रांसफर कर दिया गया।कार्यकाल पर दर्द: उन्होंने पोस्ट में लिखा, “एक अधिकारी को किसी विभाग की कार्यप्रणाली समझने में ही कम से कम एक महीने का समय लग जाता है, लेकिन मेरा कार्यकाल ही महज 2 से 3 महीने का होता है।”
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आईएएस एसोसिएशन की चुप्पी पर उठाए सवाल
नेहा मारव्या ने अपनी पोस्ट में आईएएस एसोसिएशन (IAS Association) के ढुलमुल रवैये पर भी गहरी निराशा जताई। उन्होंने लिखा कि संगठन से जो समर्थन मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। चेतावनी देते हुए उन्होंने लिखा, “आज मैं इस स्थिति में हूं, कल कोई और आईएएस अधिकारी निशाना बनेगा।”
संगठन अध्यक्ष की ग्रुप में अपील
नेहा मारव्या की इस पोस्ट के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने कथित तौर पर उन्हें आत्मविश्लेषण करने और अपने व्यवहार पर विचार करने की सलाह दी। मामले को बढ़ता देख आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव ने ग्रुप के अन्य सदस्यों से इस पोस्ट पर कोई भी सार्वजनिक प्रतिक्रिया न देने की अपील की है।
वर्तमान पदस्थापना
बता दें कि तबादला सूची जारी होने के बाद नेहा मारव्या को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं, हालांकि उनके पास प्रबंध संचालक, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति वित्त विकास निगम का दायित्व फिलहाल बरकरार रखा गया है। तबादले को लेकर किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी का इस तरह खुलकर सामने आना मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में चर्चा और विवाद का बड़ा विषय बन गया है।
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