अमेरिका और ईरान होर्मुज को खोलने के लिए तैयार हो गए हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश सबसे पहले सीजफायर को 60 दिन के लिए और आगे बढ़ाएंगे। इस दौरान होर्मुज को धीरे-धीरे खोला जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो ये पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर होगी. क्योंकि युद्ध की वजह से कई देशों में तेल का संकट पैदा हो गया. FT ने यह जानकारी मध्यस्थों और बातचीत से जुड़े लोगों के हवाले से दी है।
होर्मुज को लेकर ईरान से बड़ी खबर आई है. ईरान का कहना है कि अगले 30 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले की तरह हो जाएगा. यानि इस रास्ते पर पहले की तरह जहाज आवाजाही कर सकेंगे.
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा था। ऐसे में अगर स्ट्रेट फिर सामान्य रूप से खुलता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों को राहत मिल सकती है। युद्ध होने के बाद से दुनियाभर के कई मुल्कों में ईंधन का संकट खड़ा हो गया. इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ा. अब होर्मुज को 30 दिनों में पहले जैसे करने की बात कही जा रही है. यानि युद्ध से पहले जो स्थिति थी वो बहाल की जाएगी.
इन सब के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और उस इलाके के कुछ और देशों के बीच एक समझौता लगभग तय हो गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि इस डील में होर्मुज को फिर से खोलना शामिल है और इसका ऐलान जल्द होगा.
होर्मुज का रास्ता अगर पहले की तरह सुचारू हो जाता है तो ये भारत के लिए भी राहत की खबर होगी. क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है.
ईरान ने एक बड़ा ऐलान किया है. उसने कहा है कि अगले 30 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की तादाद फिर से पहले जैसी हो सकती है. यानी जंग से पहले जितने जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, उतने फिर से गुजरने लगेंगे. इस बयान को दुनिया भर के देश राहत की खबर के तौर पर देख रहे हैं.
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