कुंदन कुमार, पटना। उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को खत्म करने का फैसला लिया है, जिसके बाद अब उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की जगह राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने ले ली है। धामी सरकार के इस फैसले को लेकर बिहार में भी सियासत शुरू हो गई है। जदयू के पूर्व विधान पार्षद गुलाम रसूल बलियावी की इसपर प्रतिक्रिया सामने आई है।

धामी सरकार के फैसले का विरोध

गुलाम रसूल बलियावी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, देश में संविधान एक है और संविधान ने सभी को अपने तरह से शिक्षा ग्रहण करने धर्म का प्रचार प्रसार करने की छूट दी है। ये अधिकार किसी दल ने नहीं दिया है। अगर इसको लेकर कोई नया नियम कोई लागू करता है, तो वो गलत है। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है।

वहीं, जब उनसे यह सवाल किया गया कि प्रधानमंत्री कह रहे है कि एक देश एक संविधान एक विधान चलेगा तो गुलाम रसूल बलियावी ने कहा कि, संविधान एक ही है और उसी के अनुसार सरकार को काम करना चाहिए।

मील का पत्थर साबित होगा यह फैसला- सीएम धामी

मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले पर उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल उत्तराखंड ही नहीं वरन पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि, हमारी सरकार का संकल्प है कि राज्य में हर वर्ग, हर क्षेत्र और हर समुदायके बच्चे को अच्छे संस्कार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले।

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