रवि गोयल, सक्ती। जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़े भू-विस्थापितों ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत चार पक्षों के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना (Contempt of Court) याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत पात्र भू-विस्थापितों को भत्ता या अन्य लाभ उपलब्ध नहीं कराए गए।

याचिका में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के अलावा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो तथा डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है।

वर्ष 2008 में हुआ था भूमि अधिग्रहण

मामला सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट से जुड़ा है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था। जानकारी के अनुसार, प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इस प्रक्रिया में 800 से अधिक परिवारों ने अपनी जमीन दी थी।

भू-विस्थापितों का कहना है कि पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत प्रभावित परिवारों को नौकरी अथवा नियमानुसार भत्ता दिया जाना था, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिला।

2013 में शुरू हुआ प्लांट, 2016 में बंद, 2022 में वेदांता ने किया अधिग्रहण

याचिका के अनुसार, एथेना पावर प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन वित्तीय संकट के चलते वर्ष 2016 में इसे बंद करना पड़ा। बाद में वर्ष 2022 में वेदांता ग्रुप ने इस प्लांट का अधिग्रहण किया और वर्ष 2025 में इसका संचालन दोबारा शुरू किया।

भू-विस्थापितों का आरोप है कि प्लांट दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही नियमानुसार भत्ता उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि वे पिछले 13 वर्षों से अपने अधिकारों से वंचित हैं।

2021 में दायर हुई थी याचिका

भू-विस्थापित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों की ओर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। करीब दो वर्ष बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य शासन को मामले के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित समिति ने प्लांट प्रबंधन को पत्र जारी कर पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।

कलेक्टर ने भी जारी किया था निर्देश

भू-विस्थापितों का कहना है कि लगभग दो माह पहले सक्ती कलेक्टर ने भी प्लांट प्रबंधन को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पात्र परिवारों को भत्ता देने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के बाद प्रभावित परिवारों ने न्यायालय की अवमानना याचिका दायर करने का निर्णय लिया।

कलेक्टर बोले— मामले के समाधान का प्रयास जारी

पूरे मामले पर सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से प्लांट प्रबंधन को पत्र जारी कर भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन मामले के निराकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

फिलहाल मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में होना बाकी है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से न्यायालय में जवाब प्रस्तुत किया जाना है।

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