अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जिस सरकारी चौखट पर अन्नदाता अपनी पहचान और हक की गुहार लेकर पहुंचता है, वहां व्यवस्था के नुमाइंदे दिनदहाड़े जाम छलकाते पकड़े गए। जैतपुर तहसील की ग्राम पंचायत बोकरमार का पंचायत भवन इन दिनों प्रशासनिक संवेदनहीनता का अखाड़ा बना हुआ है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने हड़कंप मचा दिया है, जिसमें हल्का नंबर 54 के पटवारी ज्ञान सिंह मार्गो पंचायत भवन के भीतर शराब और कबाब की दावत उड़ाते नजर आ रहे हैं।

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मेज पर शराब की बोतलें और मांस रखा हुआ था

घटना 25 अगस्त की है, जब किसान अपनी फार्मर आईडी बनवाने की आस में पंचायत भवन पहुंचे थे, सरपंच के कक्ष का नजारा देखकर ग्रामीण दंग रह गए। मेज पर शराब की बोतलें थीं और पास ही मांस रखा हुआ था, जब ग्रामीणों ने सरकारी दफ्तर की मर्यादा याद दिलाते हुए विरोध दर्ज कराया, तो पटवारी नशे में ग्रामीणों पर ही बिफर पड़े, आरोप है कि पटवारी ने सेवा देने के बजाय अपनी कथित ‘राजघराना’ पृष्ठभूमि का रौब झाड़ा और बेखौफ लहजे में यहां तक कह डाला कि बड़े से बड़ा अधिकारी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता,

पटवारी की इस कार्यशैली से ग्रामीण त्रस्त

हल्के में बीते एक दशक से जमे पटवारी की इस कार्यशैली से ग्रामीण आजिज आ चुके हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन को मयखाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। मामले के पुख्ता वीडियो साक्ष्य एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक को सौंपे गए, लेकिन प्रशासनिक चुप्पी नहीं टूटी आखिरकार न्याय की आस खोते ग्रामीणों ने वीडियो को इंटरनेट पर साझा कर दिया ,जो अब सोशल मीडियाई तेजी से वायरल हो रही है। पंचायत भवन किसी अफसर का निजी ड्राइंग रूम नहीं, बल्कि किसानों और ग्रामीणों के बुनियादी अधिकारों का केंद्र है। ऐसे में यह घटना सिर्फ एक कर्मचारी के आचरण का पतन नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता है जहां फरियादी को काम के बदले अधिकारियों की हेकड़ी सहनी पड़ती है।

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