Dharm Desk: हिंदू धर्म में पूजा के दौरान फूलों का विशेष महत्व माना जाता है। देवी-देवताओं को अलग-अलग फूल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। फूलों से बनी मालाओं का उपयोग न केवल पूजा में बल्कि भगवान के सिंगार और मंदिर की सजावट में भी किया जाता है। अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार फूल अर्पित करने से पूजा का भाव और सुंदर हो जाता है।

भगवान को अर्पित करें उनकी पसंद के फूल

पूजा में फूल चढ़ाते समय देवी-देवता के स्वरूप और उनसे जुड़ी परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का विशेष स्थान है। तुलसी दल के साथ तुलसी की माला भी अर्पित की जाती है।

वही भगवान शिव को बेलपत्र के साथ आक और धतूरे के फूल चढ़ाने की परंपरा है।साथ ही भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा और लाल फूल अर्पित किए जाते हैं।माता दुर्गा सहित कई देवी स्वरूपों की पूजा में लाल फूलों का उपयोग किया जाता है।

गेंदे की माला धार्मिक आयोजनों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले फूलों में से एक है। इसे पूजा के साथ मंदिर और घर के पूजा स्थल की सजावट में भी लगाया जाता है।

1.कमल की माला देवी लक्ष्मी की पूजा में विशेष रूप से प्रयोग की जाती है। कमल को लक्ष्मी जी से जुड़ा प्रमुख फूल माना जाता है।इसलिए लक्ष्मी पूजन में इसका प्रयोग शुभ माना जाता है।

2.गुलाब की माला भी देवी-देवताओं को चढाई जाती है। खासकर लाल गुलाब को प्रेम श्रद्धा और समर्पण से जोड़कर देखा जाता है।
3.तुलसी की माला भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। वैष्णव परंपरा में तुलसी को पवित्र स्थान प्राप्त है।

पूजा की माला में इन बातों का रखें ध्यान

भगवान को चढ़ाने वाली माला साफ और ताजे फूलों से बनी होनी चाहिए। मुरझाए या गंदे फूलों का उपयोग करने से बचन चाहिए।
माला को पूजा से पहले साफ जगह पर रखें और फिर श्रद्धापूर्वक भगवान को अर्पित करें।
पूजा में माला की कीमत या आकार से ज्यादा महत्व श्रद्धा और भावना का माना जाता है। इसलिए साधारण फूलों की छोटी माला भी पूरी आस्था के साथ चढ़ाई जा सकती है।
अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं। ऐसे में देवी-देवताओं को फूल अर्पित करते समय अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना बेहतर होता है।

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