दिल्ली के कई ऐतिहासिक स्मारकों में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक, हौज खास, जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली में मौजूद कुछ स्मारकों में लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई है। आरटीआई जवाब की एक प्रति के अनुसार, दिल्ली में मौजूद 10 स्मारकों में से कई पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लागू हैं। इन स्मारकों के कुछ हिस्सों में संरक्षण और मरम्मत का काम चल रहा है, जिसके चलते पर्यटकों की आवाजाही सीमित की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इन ऐतिहासिक स्थलों पर संरक्षण, मरम्मत और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने का काम कर रहा है।

हौज खास और कोटला फिरोज शाह में मरम्मत का काम

आरटीआई के जवाब के मुताबिक, हौज खास और कोटला फिरोज शाह कॉम्प्लेक्स में मौजूद स्मारकों के ढांचे की मरम्मत का काम चल रहा है। वहीं तुगलकाबाद किले और गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे में पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। आरटीआई के जवाब से पता चला है कि हौज खास कॉम्प्लेक्स में इमारतों के एक हिस्से में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। यह कॉम्प्लेक्स मध्यकालीन दौर के एक बड़े जलाशय के आसपास विकसित हुआ था। बाद में यहां दिल्ली सल्तनत से जुड़ी मदरसा, मकबरा और अन्य इमारतों का निर्माण हुआ। जलाशय का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में हुआ था, जबकि बाद की प्रमुख इमारतें सुल्तान फिरोज शाह तुगलक से जुड़ी हैं। इनमें मदरसा और मकबरा भी शामिल हैं।

कुतुब मीनार और सलीमगढ़ किले में भी सुधार

आरटीआई से मिली जानकारी में कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स में लोगों की पहुंच आसान बनाने के लिए किए जा रहे सुधार कार्यों का भी उल्लेख है। इसके अलावा सलीमगढ़ किले में सिग्नल रेजिमेंट बिल्डिंग और टॉयलेट ब्लॉक की मरम्मत एवं नवीनीकरण का काम चल रहा है। वहीं लाल किले के लाहौर गेट पर पैरापेट (दीवार) समेत कुएं वाले इलाके के संरक्षण का काम भी किया जा रहा है।

जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली में भी पाबंदी

मध्य दिल्ली स्थित जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली की इमारतों में भी पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है। हालांकि, आरटीआई के जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन पाबंदियों को कब से लागू किया गया है।जंतर-मंतर का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में कराया था। यह अपने विशाल पत्थर से बने खगोलीय उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है, जिनका इस्तेमाल खगोलीय निरीक्षण और गणनाओं के लिए किया जाता था।

 लाल किले की 6 ऐतिहासिक इमारतों में प्रवेश पर रोक

एएसआई के दिल्ली सर्कल ने लाल किले के अंदर छह प्रमुख इमारतों हमाम, मोती मस्जिद, दीवान-ए-खास, खास महल, रंग महल और शीश महल में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। हमाम मुगल शासकों का शाही स्नानघर था, जबकि मोती मस्जिद को मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए बनवाया था। शाहजहां के शासनकाल में बना दीवान-ए-खास निजी मुलाकातों का प्रमुख स्थल था, जहां बादशाह रईसों और खास मेहमानों से मिलते थे। वहीं खास महल शाहजहां के निजी आवासीय हिस्से का हिस्सा था। रंग महल शाही परिवार के जीवन से जुड़ा था, जबकि शीश महल मुगल दरबार की स्थापत्य कला की एक शानदार मिसाल माना जाता है। लाल किले में कुछ इमारतों पर लगी पाबंदियां काफी पुरानी हैं। हमाम और मोती मस्जिद को लंबे समय से पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है। इसकी प्रमुख वजह वहां मौजूद नाजुक संगमरमर और बारीक नक्काशी को भारी पर्यटक भीड़ से होने वाले संभावित नुकसान का खतरा बताया गया है।

कुतुब मीनार परिसर के कुछ हिस्सों में भी प्रवेश बंद

एएसआई के मुताबिक, कुतुब मीनार परिसर के कुछ हिस्सों को भी पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है। इनमें हिंदू अवशेष कॉरिडोर की पहली मंजिल, जमाली कमाली का मकबरा और कुतुब मीनार का अंदरूनी हिस्सा शामिल हैं। कुतुब मीनार के अंदर पर्यटकों के प्रवेश पर लंबे समय से पाबंदी है। वर्ष 1981 में हुई भगदड़ के बाद मीनार के अंदर जाने की सुविधा बंद कर दी गई थी।

सफदरजंग और हुमायूं के मकबरे में भी काम

वहीं सफदरजंग के मकबरे में मस्जिद और उससे जुड़ी कोठरियों की मरम्मत का काम चल रहा है। दूसरी ओर, हुमायूं के मकबरे में पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम किया जा रहा है। इन संरक्षण और सुधार कार्यों के चलते ऐतिहासिक स्थलों के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही सीमित की गई

संरक्षण कार्यों के लिए हर साल करोड़ों का बजट

आरटीआई के जवाब में दिल्ली सर्कल के लिए पिछले पांच वर्षों में किए गए बजट आवंटन और खर्च का ब्योरा भी सामने आया है। आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में 19.10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसमें से लगभग पूरी राशि खर्च हो गई। आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में बजट बढ़कर 30.50 करोड़ रुपये हो गया और लगभग पूरी राशि खर्च हुई। इसके बाद 2023-24 में सबसे ज्यादा 36.61 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से करीब 36.57 करोड़ रुपये संरक्षण और संबंधित कार्यों पर खर्च हुए। वहीं 2024-25 में आवंटन घटकर 17.85 करोड़ रुपये रह गया और लगभग पूरी राशि खर्च की गई। 2025-26 में 28.70 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिसमें से करीब 28.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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