Dharm Desk – हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है. प्रथम पूज्य भगवान गणेश की भक्ति प्रतिदिन आराधना कर ही अपने कार्य के लिए निकलते है. भक्त गणेश वंदना, पूजा और विशेष उपाय करके बुद्धि, सुख और समृद्धि की कामना करते हैं. गणेश जी की पूजा में दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प का खास महत्व है, लेकिन एक चीज ऐसी है, जिसे अर्पित करना सख्त वर्जित माना गया है…तुलसी. तुलसी हर पूजा में जरूरी होती है, फिर गणेशजी की आराधना में इसका निषेध क्यों? इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी है. जो न केवल धार्मिक मान्यता को स्पष्ट करती है, बल्कि पूजा के नियमों को भी सम झाती है. आइए जानते हैं इसका रहस्य…

क्यों नहीं चढ़ाई जाती तुलसी की पत्ती

शास्त्रों में गणेशजी पूजा में तुलसी अर्पित करना वर्जित बताया गया है यह निषेध एक पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. एक बार गंगा तट पर तप कर रहे गणेश जी पर तुलसी मोहित हो गईं. तुलसी ने गणेश जी के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन गणेशजी ने ब्रह्मचर्य का कारण देकर मना कर दिया. इससे क्रोधित होकर तुलसी ने गणेशजी को विवाह का श्राप दे दिया. जवाब में गणेश जी ने तुलसी को दैत्य से विवाह का श्राप दे दिया.

श्राप के बाद क्या हुआ?

तुलसी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने जी से क्षमा मांगी. गणेश जी ने उन्हें भगवान विष्णु की प्रिय बनने का वरदान दिया. तभी से तुलसी विष्णु पूजा में अनिवार्य और गणेश पूजा में वर्जित मानी जाती है.

बुधवार की गणेश पूजा में क्या रखें ध्यान?

  1. तुलसी के पत्ते भूलकर भी अर्पित न करें.
  2. दूर्वा (3 या 5 पत्तियों वाली) अवश्य चढ़ाएं.
  3. मोदक, गुड़ और लाल फूल गणेश जी को प्रिय हैं. इन चीजों का भोग लगाए.
  4. ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जब करने से सभी मनोकामना पूरी होती है.

तुलसी का सही उपयोग

  1. भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी अनिवार्य है.
  2. धार्मिक अनुष्ठानों और चरणामृत में इसका विशेष महत्व होता है.