दीपक भारद्वाज, पानीपत। पार्क अस्पताल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पैर की हड्डी का इलाज करवाने आई एक महिला के दिल का ऑपरेशन कर दिया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस सनसनीखेज मामले में अब अस्पताल प्रशासन ने मीडिया के सामने आकर अपनी चुप्पी तोड़ी है और कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

अस्पताल ने मानी स्टाफ की बड़ी गलती

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अस्पताल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्वीकार किया कि उनके स्टाफ से बड़ी लापरवाही हुई है। उन्होंने माना कि सहमति पत्र पर हस्ताक्षर वाले कॉलम में अस्पताल के ही कर्मचारियों ने परिजनों के नाम लिख दिए थे। हालांकि, अस्पताल का दावा है कि उन्होंने महिला की बीमारी की गंभीरता के बारे में परिजनों को पहले ही बता दिया था।

फोन पर सहमति लेने का दावा

अस्पताल का कहना है कि जब उन्होंने मरीज के दिल में छल्ला डालने की बात कही थी, तो पहले परिजनों ने मना कर दिया था। इसके बाद दोबारा समझाने पर महिला के बेटे से फोन पर बातचीत की गई और उसकी सहमति मिलने के बाद ही दिल का ऑपरेशन किया गया था। अस्पताल का यह भी आरोप है कि महिला की मौत के बाद परिजनों ने पैसों की मांग की थी और मांग पूरी न होने पर हंगामा किया।

पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को नियम विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार किसी भी डॉक्टर या अस्पताल पर केस दर्ज करने से पहले मेडिकल बोर्ड से जांच कराना अनिवार्य होता है, लेकिन पुलिस ने बिना किसी रिपोर्ट के जल्दबाजी में मामला दर्ज कर लिया है। अस्पताल ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर यह मुकदमा रद्द करने की मांग की है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

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