Yogi Cabinet Expansion: योगी सरकार के संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर फाइनल सूची सामने आ गई है। जिसके अनुसार अब 6 नहीं बल्कि 8 मंत्री शपथ लेंगे। जानकारी के मुताबिक भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा, जबकि कैलाश राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कृष्णा पासवान राज्य मंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वहीं सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को स्वतंत्र प्रभार दिया जाएगा।

BJP विधायकों का जातीय समीकरण

बता दें कि वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी के 258 विधायक हैं। जिनमें से 45 राजपूत, 42 ब्राह्णण, ओबीसी के 84, एससी के 59 और अन्य सवर्ण विधायक की संख्या 28 हैं। इसी तरह 100 सदस्यों वाली विधान परिषद में भाजपा के 79 सदस्य हैं। इनमें राजपूत 23, ब्राहम्ण 14, ओबीसी 26, मुस्लिम 02 और अन्य सवर्ण 12 और एससी वर्ग के दो सदस्य हैं।

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जानिए इनके मंत्री बनने के पीछे समीकरण

भूपेंद्र चौधरी:- जाट राजनीति और पश्चिम यूपी का सबसे बड़ा चेहरा माने जाते है। चौधरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद क्षेत्र से आते हैं। आम जन के बीच उनकी अच्छी खासी पकड़ है और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायतीराज मंत्री की कमान संभाल चुके है। उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्य़क्ष रहते संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्तमान में भूपेंद्र चौधरी एमएलसी हैं और उनका कार्यकाल साल 2028 तक है।

कृष्णा पासवान:- दलित समाज का प्रतिनिधित्व करने वाली दलित कृष्णा पासवान का नाम भी मंत्री पद की रेस में आगे चल रहा है। सपा के पीडीए को टक्कर देने में पासवान की पहुंच और पहचान भाजपा को फायदा पहुंच सकती है। उनके मंत्री बनने से पूर्वांचल और मध्य यूपी में पासवान वोट बैंक को आसानी से साधा जा सकता है।

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हंसराज विश्वकर्मा:- पूर्वांचल की ओबीसी वोटों को साधने के लिए हंसराज विश्वकर्मा भाजपा के सबसे बड़ा राजनीतिक चेहरा हो सकते है। उनकी गिनती भाजपा के प्रमुख ओबीसी नेताओं में होती है। जिनकी वाराणसी, चंदौली, भदोही और आसपास के जिलों में अच्छी खासी पकड़ है। विश्वकर्मा लंबे समय से संगठन में भी सक्रिय रहे है। ऐसे में उनका मंत्री बनना लगभग तय है।

सुरेंद्र दिलेर:- मूल रूप से जाटव समाज से आने वाले खैर विधानसभा सीट के विधायक सुरेंद्र दिलेर का नाम भी मंत्री पद के लगभग तय माना जा रहा है। दिलेर राजनीतिक प्रष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखते है। उनके दादा किशन लाल दिलेर हाथरस लोकसभा सीट से चार बार सांसद रहे है। पश्चिमी यूपी में दलित राजनीति के लिहाज से उनका नाम काफी प्रभावशाली माना जाता है।

कैलाश सिंह राजपूत:- कैलाश राजपूत कन्नौज की तिर्वा से विधायक हैं, वो लोध बिरादरी से आते हैं। तिर्वा इलाका समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। ऐसे में सपा का किला भेदने के लिए कैलाश राजपूत काफी अहम भूमिका निभा सकते है। उन्होंने 1996 में तिर्वा विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। इसके बाद वे बसपा चले गए और 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से भाजपा के साथ जुड़े।

मनोज पांडेय:- समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रह चुके है। मनोज पांडेय की गिनती प्रदेश के कद्दावर ब्राह्मण नेता के रूप में होती है। ब्राह्मण वोट को साधने और इनके जरिये सपा के वोटर्स में सेंध लगाने के लिए मंत्री पद दिया जा रहा है। बता दें कि पांडेय ने लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से दूरी बनाई और खुलकर भाजपा का समर्थन किया था। जिसके बाद से ही उनके नाम की चर्चा चल रही थी।

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इन्हें मिला प्रमोशन

सूत्रों के अनुसार सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल सिंह को प्रमोशन मिला है। मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। कल रात से ही लखनऊ में राजनीतिक (Yogi Cabinet Expansion) हलचल तेज हो गई है। भाजपा इस विस्तार के जरिये पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक ओबीसी, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है।