लखनऊ. 4 सितंबर को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं. मुख्यमंत्री ने एक विशेष ‘पाती’ के जरिए श्रीकृष्ण जी के जीवन और उनके संदेशों को वर्तमान समाज और शासन व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की है.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में श्रीकृष्ण जी के प्राकट्य के साथ असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य और धर्म का प्रकाश प्रस्फुटित हुआ. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन आज भी समाज को सही दिशा दिखाता है.
बाल लीलाओं में छिपा गहरा संदेश
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सिर्फ आनंद देने वाली कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश छिपे हैं. उन्होंने माखन चोरी को सहजता और निश्छलता, गोप-गोपियों के साथ आत्मीयता को प्रेम और समरसता तथा कालिय नाग के दमन को अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बताया. मुख्यमंत्री ने गोवर्धन पर्वत धारण करने की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण के साथ सामूहिक एकजुटता का संदेश मिलता है. उन्होंने कहा कि ब्रज की धरती आज भी श्रीकृष्ण की दिव्य चेतना को संजोए हुए है.
‘श्रीकृष्ण कुलीनता नहीं, समरसता के प्रतीक’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण किसी एक वर्ग या कुलीनता के प्रतीक नहीं, बल्कि समरसता के प्रतीक हैं. उन्होंने समाज के हर वर्ग के साथ आत्मीय संबंध बनाए. द्वारकाधीश होने के बावजूद सुदामा के साथ उनकी मित्रता इसका उदाहरण है. योगी ने कहा कि सांदीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने और सुदामा के साथ मित्रता से यह संदेश मिलता है कि सच्चे रिश्ते पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं, बल्कि आत्मीयता से बनते हैं. उन्होंने कहा कि समानता, समरसता और आत्मीयता आज के समाज की बड़ी जरूरत है.
लोककल्याणकारी शासन की प्रेरणा बने श्रीकृष्ण
योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण के जीवन को लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना से जोड़ते हुए कहा कि अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण और लोकमंगल उनके जीवन-दर्शन के प्रमुख आधार रहे. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए काम कर रही है. गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, युवाओं को रोजगार, किसानों को सहारा और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर देने को उन्होंने लोककल्याण की इसी सोच का हिस्सा बताया.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव उत्तर प्रदेश की सनातन सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र हैं. उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों से विरासत के संरक्षण, सामाजिक समरसता और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की. साथ ही श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान किया.


