अहमदाबाद। गुजरात के महीसागर जिले का एक छोटा सा गांव रतुसिंह ना मुवाडा, जहां महज 100 घर हैं, आज देश भर में शतरंज क्रांति की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। बिना किसी महंगी अकादमी या बड़ी सुविधाओं के, इस गांव ने बीते चार सालों में 17 FIDE-रेटेड खिलाड़ी तैयार कर दिए हैं।
इस प्रेरणादायक बदलाव की नींव 2021 में रखी गई थी। गांव के सरकारी प्राइमरी स्कूल ‘बाल वाटिका’ के 45 वर्षीय गणित शिक्षक संदीप उपाध्याय ने बच्चों को शतरंज सिखाने की मुहिम शुरू की। स्कूल की जर्जर हालत और सीमित संसाधनों के बावजूद, संदीप सर ने अपने वेतन का बड़ा हिस्सा बच्चों की एंट्री फीस, यात्रा खर्च, किताबों और चेस किट पर लगाकर उनके सपनों को पंख दिए। उनके इस संकल्प को ग्रैंडमास्टर अंकित राजपरा का भी साथ मिला, जो हर महीने गांव आकर बच्चों को मुफ्त कोचिंग देते हैं।

उपलब्धियां और आंकड़े
- मेडल व ट्रॉफी: खेत मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों के इन बच्चों ने अब तक 120 ट्रॉफी और 179 मेडल अपने नाम किए हैं।
- टूर्नामेंट का प्रदर्शन: राज्य स्तर के 24 टूर्नामेंट्स में से 22 में गांव के बच्चों ने टॉप-3 में जगह बनाई।
- विशेष पहचान: गांधीनगर के ‘स्टूडेंट्स चेस फेस्टिवल’ में बाल वाटिका को ‘बेस्ट इंस्टीट्यूट’ चुना गया। साथ ही, 21 बच्चों को सरकारी डिस्ट्रिक्ट लेवल स्पोर्ट्स स्कूल में मुफ्त शिक्षा और कोचिंग के लिए चुना गया है।
गांव की सबसे होनहार छात्रा 8वीं की दिव्या चौहान हैं। एक खेत मजदूर की बेटी दिव्या लगातार दो सालों तक तालुका स्तर पर अजेय रहीं और स्टेट विमेंस रैपिड चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया। उनका सपना भारत की ग्रैंडमास्टर बनना है।
बच्चों की इस शानदार सफलता को देखते हुए महीसागर प्रशासन ने गांव में एक नया और आधुनिक स्कूल बनाने की योजना शुरू की है। यह नया परिसर मौजूदा भवन से 8.5 गुना बड़ा होगा, जिसमें खिलाड़ियों के लिए एक विशेष शतरंज हॉल भी बनाया जाएगा।
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