देहारदून. धौलास प्रकरण और कानून व्यवस्था को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार पर हमला बोला है. हरीश रावत ने कहा, धौलास में जो सबसे आपराधिक कृत्य हुआ है. राज्य सरकार ने जब नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट दिया, अपने भू-उपयोग बदलने के लिए अनापत्ति दी है, तो आप उसको छिपा क्यों रहे हैं? आपने उसको छिपाकर डेमोग्राफिक चेंज का नाम दिया और उसके साथ कहां से मुस्लिम यूनिवर्सिटी लेकर आ गए?
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आगे हरीश रावत ने कहा, ऐसा लगता है, बिना मुस्लिम यूनिवर्सिटी के तो भाजपा के शायद पितरों का तारण भी नहीं होता होगा, तो उन्हें मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम लेना पड़ता होगा! भाजपा ने जो आपराधिक कृत्य किया, वह चिंता का विषय है. क्या यह राज्य इस तरीके से चलेगा? आप इस तरीके से राज्य का संचालन करेंगे कि एक वर्ग को टारगेट बनाकर, एक वर्ग के ऊपर निरंतर प्रहार करके उनको यह जताकर कि तुम हमको राज्य में अमान्य हो और वह अमान्य इसलिए नहीं कि वह कुछ बिगाड़ रहे हैं, अमान्य इसलिए कि हमको वोट मिल जाए। पड़ोसी को पड़ोसी से घृणा, नफरत पैदा करके जो भाजपा राजनीति कर रही है, यह सब स्वीकार्य नहीं है.
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आगे उन्होंने कहा, रहा सवाल भूखंड आवंटन का, लोगों को यह तो जानकारी में है कि भूमि किस ट्रस्ट को दी, लेकिन लोग यह नहीं कह रहे हैं कि आदरणीय रामदेव जी और आदरणीय रमेश पोखरियाल जी का जो अंपायर खड़ा है, उसके लिए भी नारायण दत्त तिवारी जी ने भूमि दी और भी बहुत सारे लोग हैं जिन्हें भूमि दी. जिन लोगों की घृणित मनोवृत्ति है, वह धर्म और संकीर्णता के आधार पर चीजों को देखते हैं, तो नारायण दत्त जी ने और भी बहुत सारे आवंटन किए, उन आवंटनों से जो आज राज्य की पूंजी बन रहे हैं, लोगों को उनकी याद नहीं आ रही है.
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हरीश रावत ने ये भी कहा, अब इस प्रक्रिया में क्या प्रक्रिया रही क्या नहीं रही, यह हमें मालूम नहीं है. जिस तरीके से इसको उछाला गया और राज्य के वातावरण को दूषित करने की बात की गई, वह बहुत निंदनीय है. किसी पद के लायक आप हैं या नहीं, यह सिद्ध करने के लिए आपको बड़ी सोच रखनी पड़ती है, बड़ा विचार रखना पड़ता है और मुझे बड़ा अफसोस है कि इस मामले में कई चेहरे बहुत बेनकाब हुए हैं. राज्य की कानून व्यवस्था में निरंतर गिरावट हो रही है. इस राज्य के अंदर पुलिस बल में बहुत सारे काबिल अधिकारी हैं. लेकिन मुझे बड़ा अफसोस है, उनकी काबिलियत बहुत पीछे चली गई है.
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