Iraq-Kuwait tension: मिडिल ईस्ट एशिया में एक और जंग की आहट सुनाई देने लगी है. इराक और कुवैत के बीच एक बार फिर से टेंशन बढ़ गई है. इसके कारण 1990 के गल्फ वार के बाद एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में मंडरा रहा है. दोनों खाड़ी देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर तनाव बढ़ रहा है और ये मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच चुका है. हालांकि यह कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि पुराना विवाद है जो 1990 के गल्फ वॉर और उसके बाद के प्रस्ताव से जुड़ा है.
इसी महीने इराक ने संयुक्त राष्ट्र को अपना एक नक्शा और अपनी भौगोलिक चौहद्दी संयुक्त राष्ट्र में जमा किया. इस नक्शे में उसने फारस की खाड़ी में अपनी समुद्री सीमाओं को परिभाषित करने की कोशिश की है.
इराक का दावा है कि यह उसके क्षेत्रीय जलसीमा को स्पष्ट करता है, खासकर खोर अब्दुल्ला (Khor Abdullah) जलमार्ग और आसपास के इलाकों को. वहीं कुवैत का कहना है कि इस नक्शे में फिश्त अल-क़ैद और फिश्त अल-ईज जैसे छोटे द्वीपों और उथले क्षेत्रों को इराकी क्षेत्र दिखाया गया है. ऐसा करना कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन है. कुवैत के अनुसार ये क्षेत्र हमेशा से उसके हैं और कभी विवादित नहीं रहे.
1990 में भी टकराव हो चुका है
बता दें कि इराक और कुवैत के बीच 1990 में भी टकराव हो चुका है. ये लड़ाई 2 अगस्त 1990 को शुरू हुई. जब इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने पड़ोसी देश कुवैत पर आक्रमण कर उस पर कब्जा कर लिया. इसका मुख्य कारण कुवैत के तेल भंडार पर कब्जा और क्षेत्रीय दबदबे को बढ़ाना था. संयुक्त राष्ट्र ने इराक की निंदा की और आर्थिक प्रतिबंध लगाए. अमेरिका के नेतृत्व में 34 देशों ने गठबंधन बनाया. पहले ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड के तहत सैन्य तैयारी हुई, फिर 17 जनवरी 1991 से ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म शुरू हुआ. सद्दाम हुसैन अड़े रहे लेकिन अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी देशों के गठबंधन में इराक पर भारी बमबारी की. 28 फरवरी 1991 को 100 घंटे के जमीनी युद्ध के बाद कुवैत मुक्त हुआ.
ताजा विवाद क्या है
इराक और कुवैत के बीच ताजा टकराव इराक के उस दावे की वजह से हुआ है. जिसमें कुवैत के अनुसार इराक ने गल्फ के कई क्षेत्रों को अपने नक्शे में दिखाया है. कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इराक का दावा कुवैत की आज़ादी का उल्लंघन करता है, क्योंकि इसमें कुवैती इलाकों, जिसमें फश्त अल-कायद और फश्त अल-ऐज शोल शामिल हैं, को इराकी इलाके में रखा गया है. कुवैत के पड़ोसी अब उसके रुख का समर्थन कर रहे हैं. कतर, संयुक्त अमीरात और ओमान ने एकजुटता दिखाते हुए बयान जारी किए हैं. सऊदी अरब ने कहा कि उसे इराकी नक्शे को लेकर ‘गंभीर चिंताएं’ हैं, और कहा कि यह सऊदी-कुवैती संयुक्त इलाके में भी दखल देता है.
इराकी विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने सोमवार को एक बयान में कहा कि कुवैत ने 2014 में इराक से सलाह किए बिना अपने नक्शे संयुक्त राष्ट्र के पास जमा कर दिए थे. उन्होंने कहा कि इराक “इंटरनेशनल कानून के नियमों और तय कानूनी फ्रेमवर्क के अंदर अपने समुद्री अधिकारों को रेगुलेट करने के लिए प्रतिबद्ध है. इराक ने कहा कि इससे इस इलाके में स्टेबिलिटी और कोऑपरेशन को मज़बूत करने में मदद मिलेगी.”
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