बेगूसराय। जिले में न्याय की चक्की भले ही धीमी चली, लेकिन अंततः सत्य की जीत हुई। जिला एवं सत्र न्यायालय ने 1999 के बहुचर्चित नागो यादव हत्याकांड में 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

​क्या था मामला?

​यह घटना 4 अगस्त 1999 की है, जब बरौनी थाना क्षेत्र के बरियाही गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। मृतक के पुत्र रामाकांत यादव के अनुसार, मामूली विवाद के बाद आरोपियों ने संगठित होकर हथियारों के साथ उनके घर पर हमला किया था। इस हमले में नागो यादव के सिर पर घातक वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

​अदालती कार्यवाही और सजा

​जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) संजय कुमार की अदालत ने साक्ष्यों और 15 गवाहों के बयानों के आधार पर दिनेश यादव, मकेश्वर यादव सहित कुल 10 लोगों को दोषी करार दिया।

अदालत ने उन्हें सजा सुनाई

​आजीवन कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना।
​दंगा करने और मारपीट के लिए अतिरिक्त कारावास व आर्थिक दंड।

​लंबे ट्रायल का असर

​इंसाफ की यह लड़ाई 27 वर्षों तक चली। इस लंबी अवधि के दौरान मुख्य आरोपियों में से 5 की मौत ट्रायल के दौरान ही हो गई, जिसके कारण उनके विरुद्ध कार्यवाही बंद कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से दिलीप कुशवाहा और सूचक के वकील रणविजय कुमार निराला ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जिसके बाद यह ऐतिहासिक फैसला आया।