Bhanu Saptami 2026 : हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व होते हैं जिनकी जानकारी सीमित लोगों तक रहती है। लेकिन उनका आध्यात्मिक प्रभाव बेहद गहरा माना गया है। ऐसा ही एक विशेष व्रत है भानु सप्तमी, जो इस बार 7 जून, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन की खास बात यह है कि यह संयोग अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में बन रहा है, जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया है।

पंचांग के अनुसार, जब भी सप्तमी तिथि और रविवार एक साथ आते हैं, तब भानु सप्तमी का व्रत रखकर सूर्य देव की उपासना की जाती है। इससे पहले ऐसा संयोग वर्ष 2014 में अधिकमास के दौरान बना था। लगभग 12 साल बाद फिर से यह दुर्लभ योग बना है, जिसे ज्योतिष और धर्म दोनों दृष्टियों से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
सूर्य उपासना का खास दिन
धार्मिक कथाओं के अनुसार, सूर्यदेव अपने स्वर्ण रथ पर सवार होकर सात घोड़ों के साथ पृथ्वी पर आते हैं जो उनकी सात किरणों का प्रतीक हैं। यह दिन नई ऊर्जा, जीवन और सकारात्मकता का संकेत माना जाता है। बता दें कि सूर्य का एक नाम भानु भी है। भानु सप्तमी पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित होती है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की विधिपूर्वक पूजा, अर्घ्य और व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते है। श्रद्धालु प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित करते है और आदित्य हृदय स्तोत्र व अन्य सूर्य मंत्रों का जाप करते है।
ज्योतिषीय दृष्टि से महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में होता है। उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है। सूर्य को आत्मा, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सफलता का कारक ग्रह माना गया है। इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति को मान-सम्मान, ऊर्जा और रोगों से राहत मिलती है।
भानु सप्तमी का व्रत करने के प्रमुख लाभ
- सूर्य कृपा से स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति करने के लिए जरूरी है।
- आर्थिक समस्याओं में राहत और समृद्धि का सूर्यदेव से आर्शीवादमिलता है।
- मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि के साथ करियर में तरक्की मिलती है।
अविवाहित महिलाओं को योग्य वर मिलने का आशीर्वाद
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भानु सप्तमी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक अवसर है। इस बार बना यह दुर्लभ संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष फल दयी माना जा रहा है।
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