प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को याद वाशेम स्थित होलोकॉस्ट पहुंचे और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उनके साथ इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद थे। यरूशलम स्थित याद वाशेम हिटलर की नाजी फौज के नरसंहार में मारे गए यहूदियों का आधिकारिक स्मारक है। इसे 1953 में निर्मित किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर की नाजी फौज एवं उसके सहयोगियों ने करीब 60 लाख यहूदियों की हत्या की। इन मारे गए लोगों की याद में यह स्मारक बनाया गया है। इसके बाद मोदी इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मिले।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान इसाक ने मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है, जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। वहीं पीएम मोदी ने कहा कि इजराइल के दिलों में भारतीयों के प्रति गहरा लगाव है। पीएम मोदी ने इस मौके पर राष्ट्रपति इसाक को भारत आने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि आप कुछ दिन समय निकाल कर भारत आए। हमें आपका स्वागत करने का अवसर दें।

डिफेंस डील संभव

मोदी थोड़ी देर में इजराइली PM नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर सुरक्षा और एडवांस टेक्नोलॉजी के लेकर बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच बड़ी डिफेंस डील हो सकती है। मोदी बुधवार को दो दिन के इजराइल दौरे पर पहुंचे थे। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को भी संबोधित किया। उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया गया। मोदी नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

हिटलर के शासन में मारे गए यहूदियों की याद में बना ‘यद वाशेम’ स्मारक

याद वाशेम होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक इजराइल की राजधानी यरुशलम में स्थित है और हर साल दुनिया भर से लोग यहां आकर इतिहास को समझते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी। इस नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इजराइल की संसद नेसेट ने साल 1953 में फैसला किया कि होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों की याद में एक खास स्मारक बनाया जाए।

बाद में 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय खोला गया, ताकि आने वाली पीढियां इस त्रासदी को समझ सकें। याद वाशेम परिसर में होलोकॉस्ट संग्रहालय, हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक और राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन जैसी जगहें मौजूद हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीडितों की व्यक्तिगत कहानियां सुरक्षित रखी गई हैं। याद वाशेम नाम का अर्थ है याद और नाम, यानी जिन लोगों को मिटाने की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे।

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