भुवनेश्वर। ओडिशा में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे ने मंगलवार को घोषणा की कि वह आगामी राज्यसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ेंगे। उनके इस ऐलान से राज्य की चौथी सीट के लिए मुकाबला रोचक और कांटे का होने के संकेत मिल रहे हैं।
एक क्षेत्रीय न्यूज चैनल से बातचीत में रे ने बताया कि वह 5 मार्च को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके इस फैसले के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी की ओडिशा इकाई ने उन्हें समर्थन देने का ऐलान कर दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने स्पष्ट किया कि पार्टी चौथी राज्यसभा सीट के लिए दिलीप रे की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी।
चार सीटों पर चुनाव, चौथी पर नजरें
ओडिशा में इस बार राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा के पास दो सीटें जीतने की पर्याप्त ताकत मानी जा रही है, जबकि बीजू जनता दल (बीजद) की एक सीट लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में चौथी सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
भाजपा ने आधिकारिक रूप से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बीजद ने अपनी सुनिश्चित सीट के लिए संतृप्त मिश्रा को मैदान में उतारा है और चौथी सीट के लिए डॉ. दत्तेश्वर होता को साझा उम्मीदवार घोषित किया है।
समर्थन जुटाने की कोशिशें तेज
डॉ. होता ने रविवार को कांग्रेस नेताओं और विधायकों से मुलाकात कर समर्थन मांगा। इससे साफ है कि चौथी सीट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सक्रिय रणनीति और समर्थन जुटाने का दौर जारी है।
चुनाव कार्यक्रम
निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित है। 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) होगी, जबकि उम्मीदवार 9 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकते हैं। मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतगणना भी उसी दिन बाद में की जाएगी।
दिलीप रे के निर्दलीय मैदान में उतरने और भाजपा के समर्थन की घोषणा के बाद राज्यसभा की चौथी सीट पर सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। अब सभी की निगाहें 5 मार्च को होने वाले नामांकन और संभावित राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी हैं।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

