लखनऊ. 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बंगाल पहुंची थी. जहां प्रोटोकॉल को पूरी तरह से दरकिनार किया गया. न तो प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और न ही उनका कोई मंत्री स्वागत के लिए पहुंचा. जिसे लेकर सियासी पारा गरमा गया है. विपक्षी दल संविधान पद का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं. इन सबके बीच बसपा सुप्रीमो मायावती का भी बयान सामने आया है. मायावती ने घटना की निंदा करते हुए ममता बनर्जी को मैसेज दिया है.

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मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक़ सभी को मा. राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना जरूरी है. इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है. वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं, लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिये था, यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण है.

आगे उन्होंने कहा, इसी प्रकार पिछले कुछ समय से संसद में भी ख़ासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है. सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए तो यह बेहतर होगा. इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी मांग.

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क्या है सियासी पारा गरमाने की वजह

बता दें कि 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति जब शामिल होने पहुंचीं तो प्रोटोकॉल के अनुसार उनके स्वागत के लिए न ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद रहीं और न ही कोई मंत्री. इसके पहले कार्यक्रम स्थल को भी बदल दिया गया जिसे लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नाराजगी जताई. जिस पर ममता बनर्जी ने सफाई भी दी है. उनका कहना है कि वे अनशन पर बैठी थी. इसी वजह से उन्हें दौरे की जानकारी नहीं थी. न ही आयोजकों ने सरकार को इस बात की जानकारी दी.