राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में पिछले महीने सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरने से हुई एक बाइकर की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में मुख्य कॉन्ट्रैक्टर हिमांशु गुप्ता को उदयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद से आरोपी फरार चल रहा था और उदयपुर में छिपा हुआ था। पुलिस के अनुसार, सड़क पर खोदे गए गड्ढे को सही तरीके से ढका या सुरक्षित नहीं किया गया था, जिसके कारण बाइकर उसमें गिर गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने लापरवाही के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस के पश्चिमी जिले की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वायड (AATS) की टीम को जानकारी मिली थी कि हिमांशु गुप्ता उदयपुर में छिपा हुआ है। इसके बाद इंस्पेक्टर मुकेश मीणा की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद से आरोपी फरार चल रहा था। पुलिस को उसके उदयपुर में होने की पुख्ता सूचना मिली, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
अदालत ने जारी के किए थे गिरफ्तारी वारंट
अदालत ने हिमांशु गुप्ता समेत दो ठेकेदारों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि लापरवाही के आरोप में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के तीन अधिकारियों को सस्पेंड भी कर दिया गया है। दरअसल, 5 फरवरी 2026 की रात जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के करीब 20 फीट गहरे खुले सीवर गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत हो गई थी। कमल ध्यानी रोहिणी स्थित एक निजी बैंक में काम करता था।
हाईकोर्ट का ठेकेदारों को अग्रिम जमानत देने से इनकार
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने 25 फरवरी को इस मामले में दो ठेकेदारों को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि सार्वजनिक सड़कों को मौत के जाल में बदलने नहीं दिया जा सकता। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि ठेके की शर्तों के अनुसार हिमांशु गुप्ता और कवीश गुप्ता की जिम्मेदारी थी कि मौके पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसमें गड्ढे के आसपास बैरिकेड, इंडिकेटर, चेतावनी संकेत, बचाव उपकरण, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और किसी हादसे की स्थिति में पुलिस व मेडिकल अधिकारियों को तुरंत सूचना देना शामिल था।
अदालत ने कहा कि करीब 20 फुट लंबा, 13 फुट चौड़ा और 14 फुट गहरा गड्ढा व्यस्त सड़क के बीचोंबीच बिना किसी इंडिकेटर, बैरिकेड या सुरक्षा उपायों के खोदा गया, जो कार्य परमिट, टेंडर और ट्रैफिक पुलिस की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे हालात में किसी दुर्घटना का होना लगभग अपरिहार्य था।
हाईकोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने कहा “अब समय आ गया है कि दिल्ली के नागरिकों को हल्के में न लिया जाए और उनके जीवन को महत्व दिया जाए। इस तरह की घटनाओं को केवल ठेके की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। सार्वजनिक सड़कों को मौत का जाल नहीं बनने दिया जा सकता।”
अदालत ने आगे कहा “समुदाय को यह संदेश भी जाना चाहिए कि किसी व्यक्ति या संस्था को सार्वजनिक ठेका दिए जाने पर वह जिम्मेदारी के साथ इसे पूरा करे और यदि ऐसी जिम्मेदारी नहीं निभायी जाती है, तो जवाबदेही और कानून का पालन होना चाहिए।” न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि व्यस्त सड़कों पर खुदाई करते समय बुनियादी सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना आम जनता के जीवन को भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
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