प्रमोद कुमार, कैमूर। जिले के भभुआ प्रखंड के अखलासपुर गांव के रहने वाले कनिष्क कुमार ने यूपीएससी 2025 में 280वां रैंक लाकर बिहार और कैमूर का नाम रोशन किया है। यूपीएससी में सफलता हासिल करने के बाद आज रविवार (15 मार्च) को कनिष्क का घर आगमन हुआ। कनिष्क के घर आगमन पर उनका फूल-माला के साथ जोरदार स्वागत हुआ।
पूर्व विधायक के पौत्र हैं कनिष्क
इस मौके पर घर वालों और ग्रामीणों की ओर कनिष्क कुमार के स्वागत के लिए एक सभा का आयोजन किया गया था, जिसमें शहर के बुद्धिजीवियों और समाजसेवी शामिल हुए। परिवार ईसे गौरव का पल मान रहा है। वहीं, कनिष्क को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। कनिष्क भभुआ के पूर्व विधायक स्वर्गीय रामलाल सिंह के पौत्र (पोते) बताए जा रहे हैं।
परिवार और दोस्तों को दिया सफलता का श्रेय
कनिष्क कुमार ने बताया कि, परिश्रम से ही सफलता मिलती है। परिश्रम से हार मानकर थकना नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि, 2020 में वह इंडियन इकोनॉमिक सर्विस में काम कर रहे थे। अभी वह मिनिस्ट्री आफ फाइनेंस में कार्यरत हैं। लोगों का सेवा करना देश का नाम रोशन करना और आसपास के लोगों को खुश करना ही मेरा लक्ष्य है। मैं बहुत खुश हूं।
कनिष्क ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार जनों और दोस्तों को दिया। उन्होंने कहा कि, आज वह उनके बदौलत इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं। साथ ही कनिष्क ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि, आप अपना लक्ष्य सीधा रखें और इस पर केंद्रित होकर पढ़ाई करें। कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। असफलताएं आती हैं, तभी आदमी सफलता के मुकाम की सीढ़ी चढ़ पता है।
पढ़ाई से रहा है नाता…- कनिष्क के पिता
कनिष्क के पिता मिलन सिंह ने कहा कि, कनिष्क का पढ़ाई के प्रति शुरू से ही लगाव रहा है। उन्होंने कहा कि, मेरे पिता (पूर्व विधायक स्वर्गीय रामलाल सिंह) ने कई स्कूल, कालेज खुलवाए हैं। मैंने भी भभुआ में डिग्री कॉलेज खोला। मैं MA, LLB हूं, पढ़ाई से शुरू से ही नाता रहा है। बेटे को भी अच्छा पढ़ाई करने के लक्ष्य को लेकर चला था, जिसका नतीजा रहा कि आज मेरे बेटे ने यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि, शिक्षा के महत्व को हमलोग बखूबी जानते हैं। भले आधी रोटी खायेंगे लेकिन पढ़ाई करेंगे, जिसका नतीजा रहा कि मेरा बेटा आज इस मुकाम को छु पाया है।
वहीं, कनिष्क की मां विजय लक्ष्मी ने बताया कि, बहुत खुशी हो रही है कि मेरा बेटा इस लक्ष्य को पाया है। मैं सभी को कहूंगी परिश्रम से घबराना नहीं है, जो परिश्रम करेगा। उसको सफलता मिलेगा ही। यह कैमूर के लिए गर्व की बात है।
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