अविनाश श्रीवास्तव, रोहतास। चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत आज गुरुवार 19 मार्च से हो गई है। ऐसे में सासाराम के प्राचीन ताराचंडी देवी स्थान पर सुबह से दर्शन व पूजा-पाठ करने को लेकर श्रद्धालुओं की भारी उमड़ पड़ी है। सभी श्रद्धालु कतारबद्ध होकर पूजा अर्चना कर रहे हैं।

भक्तों की पूरी होती हैं मनाकामानएं

बता दें की कैमूर पहाड़ी के गुफा में देवी ताराचंडी अवस्थित है। जहां, विशेष पूजा अर्चना की परंपरा रही है। खासकर चैत नवरात्र में यहां विशेष तरह से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से देवी ताराचंडी की आराधना करते हैं। उनकी तमाम मनोकामनाएं सिद्ध हो जाती हैं।

देवी के ‘तारा’ रूप की होती है पूजा

ताराचंडी देवी स्थान में देवी के “तारा” रूप की पूजा होती है। यहां देवी पर पूरी और हलवा का भोग लगता है। बड़ी बात यह है कि नवरात्र में यहां अखंड दीप जलाने की परंपरा है, जो भी श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना पूरी होने पर आते हैं, वो 9 दिनों का अखंड दीप जलाते हैं। यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है।

51 शक्तिपीठों में से एक हैं मां ताराचंडी

मां ताराचंडी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के चक्र से खंडित होकर माता सती के तीन नेत्रों में एक दाया नेत्र यहीं पर गिरा था, तारा शक्तिपीठ के नाम से विख्यात हुआ।

साल भर भक्तों का लगा रहता है तांता

मंदिर कमेटी के लोगों का कहना है कि चैत्र नवरात्र को देखते हुए श्रद्धालुओं के सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई है। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो। इसको देखते हुए कमेटी के सदस्य क्रियाशील रहते हैं। मंदिर के पुजारी अभय गिरी का कहना है कि, देवी ताराचंडी की महिमा अपरंपार है। वैसे तो सालों भर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्र में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है।

पहले दिन मां शैलपुत्री की होती है पूजा

गौरतलब है कि आज गुरुवार 19 मार्च से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-पाठ करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाती है। इस दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है, जिन्हें शक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान भक्त पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

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