सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। अजब एमपी की गजब कहानी, आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं एक ऐसा ही गजब मामला…जहां एक महिला जो सालों पहले इस दुनिया को छोड़ चुकी थी, उसे फिर से “मार दिया गया”। जी हां…कागजों में, सरकारी रिकॉर्ड में एक ही महिला की दो-दो बार मौत दर्ज कर दी गई। इस पूरी कहानी के पीछे छिपा है- जमीन का बड़ा खेल।
ये है पूरा मामला
ये कहानी है मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के एक छोटे से गांव धतूरा की। जहां कलावती उपाध्याय की मौत सालों पहले हो चुकी थी। यानी 1989 में परिवार ने अंतिम संस्कार किया। डेथ सर्टिफिकेट बना और जिंदगी आगे बढ़ गई, लेकिन मौत के ठीक 24 साल बाद यानी 16 अक्टूबर 2013 में अचानक एक नया दस्तावेज सामने आता है। जिसमें लिखा होता है- उसी महिला की मौत फिर से हो गई! इस पूरी कहानी के पीछे मकसद था जमीन।
महिला के नाम पर थी कीमती जमीन
महिला के पास कीमती जमीन थी। जिसे हथियाने के लिए कलावती के परिवार व नात रिश्तेदार अपने नाम करने के लिए डुप्लीकेट डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर सजरा, वार्ड पार्षद से प्रमाण पत्र और वसीयत लगाकर तहसील के कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से नामांतरण करा लिया गया। एसडीएम की जांच रिपोर्ट में भी इस गड़बड़ी का उल्लेख है, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
एक नया डेथ सर्टिफिकेट
इस बात की सच्चाई जानने के लिए नगर निगम के जन्म मृत्यु पंजीयन शाखा में जाकर कलावती की मृत्यु पंजीयन को रिकार्ड में देखा तो उसकी मौत 25 फरवरी 1989 में हो चुकी है जो कि रिकार्ड में भी दर्ज है। लेकिन महिला की मौत के उसके सगे संबंधियों ने जमीन हड़पने के लिए 24 साल बाद फिर मौत करा दिया। पहले पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज किया गया फिर नए दस्तावेज तैयार किए गए और आखिर में एक नया डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया!
उठे कई सवाल
अब सवाल ये है कि ये हुआ कैसे? क्या अधिकारियों ने जांच नहीं की? क्या रिकॉर्ड मिलान नहीं हुआ? या फिर ये पूरा खेल मिलीभगत का है? अगर एक मृत महिला को दो बार मारा जा सकता है तो जिंदा लोगों के साथ क्या हो सकता है?
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश
3 सितंबर 2025 का कलेक्टर का एक आदेश मिला, इस आदेश में भी फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का भी उल्लेख है और इस मामले में दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश है, लेकिन 6 माह बीत जाने के बाद भी इस मामले में कोई कार्यवाही नही हुई है। अब एक बार फिर शिकायतकर्ता इस मामले में कलेक्टर से लेकर पुलिस प्रशासन तक शिकायत कर रहें है लेकिन शिकायत के बाद भी इतने गंभीर मामले पर जिला प्रशासन कोई ठोस एक्शन लेने के मूड में नही दिख रहे है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने साधी चुप्पी
वहीं इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर से लेकर एडसीएम, तहसीलदार और नगर निगम के आयुक्त से उनका पक्ष जानने की कोशिश की तो उन्होंने कैमरे पर बोलने से साफ इंकार कर दिया। लेकिन यह मामला सामने आने के बाद प्रसाशनिक अमले में हड़कंप मच गया है। ये सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, ये उस सिस्टम की कहानी है, जहां कागजों में जिंदगी और मौत दोनों को बदला जा सकता है। जहां एक सर्टिफिकेट किसी की जमीन, किसी की पहचान, सब कुछ छीन सकता है। अब देखना ये है कि इस ‘दोहरी मौत’ का सच कितनी जल्दी सामने आता है या फिर ये मामला भी कागजों में ही दफन हो जाएगा।

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